राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण 2024-25 में देश के रजिस्टर्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की तस्वीर सामने आई है। देश के 5 राज्य तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ऐसे हैं, जहां देश के कुल 53.3 प्रतिशत कारखाने हैं। ये आंकड़े अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक के हैं।

 

तमिलनाडु में कारखानों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 15.44 प्रतिशत है लेकिन उत्पादन में गुजरात सबसे आगे है। देश के कुल उत्पादन में गुजरात का हिस्सा 16.93 प्रतिशत है, जबकि कारखानों में इस राज्य की हिस्सेदारी 12.39 प्रतिशत है। ग्रॉस वैल्यु एडेड (GVA) में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है।

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देश के कौन से राज्य, क्या कर रहे हैं?

NSO के सर्वे में कारखानों की संख्या, स्थायी पूंजी, कुल रोजगार, उत्पादन और GVA की तुलना की गई है। कारखानों और रोजगार में तमिलनाडु पहले नंबर पर है। तमिलनाडु की हिस्सेदारी कारखानों में 15.44 प्रतिशत और रोजगार में 14.99 प्रतिशत है। 

 

स्थायी पूंजी और उत्पादन में गुजरात पहले नंबर पर है। गुजरात का हिस्सा स्थायी पूंजी (Fixed Capital) में 19.87 प्रतिशत और उत्पादन में 16.93 प्रतिशत है। GVA में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है। उसका हिस्सा 15.92 प्रतिशत है और गुजरात 14.10 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है। दोनों राज्यों के आंकड़ों में फर्क साफ दिखता है। 

गुजरात के पास कारखाने कम लेकिन प्रदर्शन तगड़ा

तमिलनाडु के पास कारखाने ज्यादा हैं, लेकिन स्थायी पूंजी में राज्य का हिस्सा 8.53 प्रतिशत और उत्पादन में 10.87 प्रतिशत है। गुजरात के पास कारखाने कम हैं, लेकिन स्थायी पूंजी में हिस्सेदारी 19.87 प्रतिशत है। देश की कुल स्थायी पूंजी का करीब पांचवां हिस्सा गुजरात में है।

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देश के दूसरे राज्यों का हाल क्या है?

हर पैमाने पर शीर्ष पांच राज्यों की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही। स्थायी पूंजी में यह 54.26 प्रतिशत, कुल रोजगार में 56.22 प्रतिशत, उत्पादन में 56.73 प्रतिशत और GVA में 54.87 प्रतिशत है। हर पैमाने पर पांच राज्यों की सूची थोड़ी अलग है। 

 

उत्तर प्रदेश कारखानों, रोजगार और उत्पादन में चौथे नंबर पर है। GVA में पांचवें नंबर पर है। कर्नाटक चार पैमानों पर शीर्ष पांच में है। स्थायी पूंजी में ओडिशा चौथे नंबर पर है और रोजगार में हरियाणा पांचवें नंबर पर है।

किस सेक्टर का कितना योगदान है?

उद्योगों में खाद्य उत्पादों के पास सबसे ज्यादा 16.19 प्रतिशत कारखाने और 11.24 प्रतिशत रोजगार है। स्थायी पूंजी, उत्पादन और GVA में तांबा, एलुमिनियम जैसी बेसिक धातुओं से जुड़े उद्योग सबसे आगे हैं। उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 17.73, 13.67 और 11.58 प्रतिशत है।

देश के रजिस्टर्ड कारखानों का हाल क्या है?

पूरे देश में रजिस्टर्ड कारखानों की संख्या 2,66,931 है। यह आंकड़ा पिछले साल से 2.64 प्रतिशत ज्यादा है। कुल रोजगार 7.19 प्रतिशत बढ़कर 2.10 करोड़ के करीब पहुंच गया है। उत्पादन 7.81 प्रतिशत और GVA 9.59 प्रतिशत बढ़ा है। यह सर्वे 86,547 यूनिटों के विश्लेषण पर आधारित है। यह एक वैधानिक सर्वे है, जो सांख्यिकी संग्रह अधिनियम 2008 के तहत होता है। 

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सिर्फ 5 राज्यों का ही क्यों है दबदबा?

अगर गौर करें तो ये राज्य वही हैं, जहां से एक्सपोर्ट आसान है। यहां उद्योग लगाने के लिए जरूरी हर सुविधा मौजूद है। गुजरात और महाराष्ट्र को समुद्र तट और बड़े बंदरगाहों का फायदा मिलता है, जिससे विदेशों से कच्चा माल लाना और तैयार माल बेचना आसान और सस्ता पड़ता है। गुजरात में बड़े पेट्रोकेमिकल और रिफाइनरी प्लांट होने से उत्पादन मूल्य सबसे ज्यादा है। 

 

तमिलनाडु और कर्नाटक में कुशल कारीगर, इंजीनियर और ऑटो-कपड़ा उद्योग के बेहतरीन नेटवर्क हैं, जिससे वहां छोटे-बड़े कारखानों की संख्या सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश में मजदूर बेहतर हैं, नए एक्सप्रेसवे और बड़े उपभोक्ता बाजार का सीधा लाभ मिल रहा है। इन सभी राज्यों में 24 घंटे बिजली, बेहतरीन सड़कें और उद्योग-अनुकूल सरकारी नीतियां भी हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में इन राज्यों की रैंकिंग बेहतर है। 

इन राज्यों में कितना आसान है व्यापार?

कारोबार को आसान बनाने के नीतिगत सुधारों (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु 'टॉप अचीवर्स' हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 'अचीवर' बनकर तेजी से उभर रहा है। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) खींचने में महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे आगे हैं। गुजरात और तमिलनाडु नीतियां और सुविधाएं बेहतर करने में बाजी मार रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक देश का सबसे ज्यादा विदेशी पैसा जुटा रहे हैं। उत्तर प्रदेश अपनी'निवेश मित्र' योजना की वजह से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। बेहतर माहौल के दम पर नए निवेश के लिए एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहा है।