भारत में बिजली की मांग लगातार बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस वजह से शेयर बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर जब भी बिजली सेक्टर की बात होती है, तो लोगों का ध्यान सिर्फ बिजली बनाने वाली कंपनियों पर जाता है। पिछले दो साल का मार्केट ट्रेंड कुछ अलग ही कहानी बता रहा है। अब निवेशकों का भरोसा बिजली बनाने वाली कंपनियों से कहीं ज्यादा बिजली पहुंचाने वाली यानी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों पर बढ़ रहा है।
एनइनरैक की 'इंडिया ट्रांसमिशन मार्केट रिपोर्ट' के मुताबिक, देश में बिजली की खपत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इसका बड़ा कारण देश में लगातार बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, नई फैक्ट्रिया और सोलर-विंड जैसे नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स हैं।
आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बिजली बनाना नहीं है बल्कि उस बिजली को सही समय पर और बिना किसी रुकावट के सही जगह तक पहुंचाना है। यही वजह है कि सरकार और कंपनियां अब बिजली पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसी वजह से शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों के दाम काफी तेजी से ऊपर जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: देश के सनराइज सेक्टर कौन से हैं, जिनसे है तगड़े मुनाफे की उम्मीद?
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सोलर और विंड यानी धूप और हवा से बनने वाली बिजली के प्रोजेक्ट्स बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत की बनावट ऐसी है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात और लद्दाख जैसे दूरदराज के इलाकों में ही लग रहे हैं। इसके बिल्कुल उलट, बिजली की सबसे ज्यादा मांग दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों और नई फैक्ट्रियों वाले इलाकों में होती है। अगर इन दूर के इलाकों से बिजली को बड़े शहरों तक लाने के लिए ट्रांसमिशन लाइंस और ग्रिड नेटवर्क नहीं होंगे तो वहां बनी हुई बिजली भी आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगी।
इसी वजह से बिजली पहुंचाने वाला यह सेक्टर अब पूरे पावर सिस्टम का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों में शेयर बाजार में बिजली के टावर, हाई वोल्टेज लाइन और सबस्टेशन बनाने वाली कंपनियों के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं, निवेशकों को अब यह बात अच्छी तरह समझ आ गई है कि मजबूत ग्रिड नेटवर्क के बिना बनाई गई बिजली भी बेकार हो जाएगी।
निफ्टी एनर्जी और निफ्टी 50 मार्केट ट्रेंड
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की जुलाई 2026 की डेटा रिपोर्ट बताती है कि इस साल शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव और गिरावट आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया भर में चल रहा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का घटना-बढ़ना है। इस भारी गिरावट के बीच भी एनर्जी सेक्टर निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित जगह साबित हुआ है। इस डेटा रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में हर तरफ मची बिकवाली के कारण बड़े निफ्टी 50 इंडेक्स में इस साल अब तक 7.42 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बिल्कुल उलट, निफ्टी एनर्जी इंडेक्स ने इस कमजोरी को पीछे छोड़ दिया है। निफ्टी एनर्जी इंडेक्स ने इसी समय के दौरान 10.52 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। इस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में पेट्रोलियम, नेचुरल गैस और बिजली बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ ग्रिड और बिजली पहुंचाने वाली ट्रांसमिशन कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों की मजबूती के कारण यह पूरा सेक्टर बाजार की गिरावट में भी मजबूती से टिका हुआ है।
सरकार का मेगा प्लान
प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी मिनिस्ट्री ऑफ पावर की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान (2023–2032) के तहत बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क को बड़ा करने की एक मजबूत योजना बनाई है। इस पूरे सिस्टम को बदलने के लिए 9.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने का अनुमान है। सरकार ने इसके लिए कुछ बेहद साफ लक्ष्य तय किए हैं जिसके तहत देश में बिजली के तारों के नेटवर्क को अभी के 5 लाख सर्किट किलोमीटर से बढ़ाकर 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रिड नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए ग्रिड ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी को बढ़ाकर 2,345 गीगा वोल्ट एम्पीयर (GVA) किया जाएगा। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के बीच बिजली के बेहतर तालमेल के लिए इंटर-रीजनल पावर ट्रांसफर कैपेसिटी यानी एक जगह से दूसरी जगह बिजली भेजने की क्षमता को भी 120 गीगावाट से बढ़ाकर 168 गीगावाट किया जाएगा ताकि देश के किसी भी कोने में बिजली की कोई कमी न हो।
यह भी पढ़ें: पैसा डबल होने का 'रूल ऑफ 72', जानिए FD से गोल्ड तक कहां, कितना समय लगेगा?
डेटा सेंटर्स की वजह से बढ़ी मांग
आने वाले समय में बिजली की मांग को बढ़ाने में पुरानी फैक्ट्रियों के साथ-साथ नई तकनीक की भी बड़ी भूमिका है। एआई डेटा सेंटर्स को हर समय बिना किसी रुकावट के बिजली चाहिए होती है। इसके अलावा देश भर में बढ़ रही इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स और नई फैक्ट्रियों के खुलने की वजह से आने वाले सालों में बिजली की मांग और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। इसी जरूरत को देखते हुए सरकार बिजली पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है ताकि सोलर-विंड जैसी नई बिजली और फैक्ट्रियों की बढ़ती मांग दोनों को एक साथ आसानी से संभाला जा सके।
