शेयर मार्केट, जमीन या गोल्ड में निवेश के बारे में आम उम्मीद होती है कि समय के साथ पैसे बढ़ते जाएंगे। इसके उलट पिछले एक साल में भारतीय शेयर मार्केट खस्ताहाल है। दिग्गज कंपनियों के शेयरों के दाम लगातार कम होते जा रहे हैं। इस बीच कई कंपनियों के IPO भी औंधे मुंह गिरे हैं। हालत ऐसी है कि म्यूचुअल फंड के लिए सिस्टमेंट इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) करने वाले भी अब आशंकित हैं। फंड मैनेजर्स भी परेशान हैं और आम निवेशकों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि शेयर मार्केट से हटकर म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए जाएं या नहीं।

 

इस डर की बड़ी वजह है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का NIFTY पिछले एक साल में बढ़ने के बजाय कुल 2563 प्वाइंट टूट चुका है। 17 अक्तूबर 2025 को 23,146 पर चल रहा NIFTY 16 अक्तूबर 2026 को 23136 पर बंद हुआ। 8 अक्तूबर 2026 को यह 22231 तक पहुंच गया था जो कि साल भर में सबसे कम था। यही हाल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के BSE सेंसेक्स का भी है। एक साल में यह इंडेक्स कुल 9223 अंक टूट चुका है। 17 अक्तूबर 2025 को 83952 पर रहा BSE 16 अक्तूबर 2026 को 73033 पर बंद हुआ। अक्तूबर महीने में ही इसने साल भर का सबस निचला स्तर भी छुआ और 71598 पर पहुंच गया।

 

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ये आंकड़े बताते हैं कि शेयर मार्केट लगातार गिरावट की ओर है। विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशक भी पैसे निकाल रहे हैं और इसका असर अब निवेश के बाकी साधनों पर भी पड़ रहा है। जाहिर सी बात है कि म्यूचुअल फंड भी अब इससे प्रभावित होने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि गिरावट के इस दौर में म्यूचुअल फंड की SIP जारी रखनी चाहिए या नहीं।

खरीद और बिक्री का सिस्टम समझिए

शेयर मार्केट गिरने का समय खरीदारी का होता है और उठने का समय बिक्री का। अगर आपके पास किसी भी कंपनी के शेयर नहीं हैं और गिरावट के दौर में खरीदते हैं और कुछ समय बाद उसी कंपनी के शेयर के दाम बढ़ने पर उसे बेच देते हैं तो आपका लाभ होता है। शेयर मार्केट में मुनाफा कमाने का फौरी तरीका यही है। इसी तरह अगर आपने किसी कंपनी के दाम महंगी कीमत पर खरीदें हो और उसके शेयर के दाम गिरने लगें तो उस वक्त बेचने के बजाय और इंतजार करने की सलाह दी जाती है। कई निवेशक गिरावट के दौर में उसी कंपनी के और शेयर कम दाम में खरीदकर अपने प्रति शेयर के दाम का औसत कम कर लेते हैं। इसी को एवरेजिंग कहा जाता है। 

 

अब बाती है म्यूचुअल फंड की। शेयर मार्केट में जहां आप एक या कुछ कंपनियों के शेयर सीधे खरीदते हैं, वहीं म्यूचुअल फंड में आप उतने ही पैसों में कई कंपनियों में निवेश करते हैं। सामान्य तौर पर म्युचूअल फंड चलाने वाले फंड मैनेजर सारे पैसों को इक्विटी फंड, डेट फंड, कमोडिटी फंज और हाइब्रिड फंड यानी बॉन्ड और गोल्ड में निवेश करते हैं। इसी का असर होता है कि किसी भी एक चीज के दाम घटने या बढ़ने से म्यूचुअल फंड बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होता है।

 

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गिरावट के समय SIP रोकनी चाहिए या नहीं?

WhiteOak Capital Mutual Fund की एक रिपोर्ट सीधे शब्दों में कहती है कि निवेशकों को लंबे समय के निवेश पर ध्यान देना चाहिए और कम समय में होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि अगर आपने कोई SIP 10 साल का समय लेकर शुरू की है तो आपको ऐसे उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस रिपोर्ट में अगस्त 1996 से मई 2026 के बीच BSE सेंसेक्स के टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) का अध्ययन किया गया है। 

 

यह बताता है कि जिन SIPs में शुरुआत के पांच साल में कम रिटर्न दिख रहा था, उन्हें 10 साल के बाद बेहतर रिटर्न मिला। SIP की तारीख तय करने के सवाल पर यह रिपोर्ट कहती है कि निवेशकों को किसी खास दिन का इंतजार करने के बजाय अपनी सैलरी आने के समय के आसपास ही SIP की तारीख रखनी चाहिए। इतना ही नहीं, यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि डेली, वीकली औऱ मंथली SIP में निवेश के रिटर्न भी लगभग एक जैसे ही रहे हैं।

SIP रोकने से क्या होगा? 

आम तौर पर जब आप SIP लेते हैं तो हर महीने नेट असेट वैल्यू (NAV) के हिसाब से आपको यूनिट मिलती हैं। यह NAV हर दिन बदलता रहता है। हालांकि, शेयर मार्केट की तरह इसमें बहुत ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं होता। उदाहरण के लिए Quant BFSI Fund - Growth Option - Direct Plan का NAV 1 जनवरी 2026 को 20.16 रुपये था और 16 अक्तूबर को यह 20.54 रुपये था। इस समय अंतराल में यह न्यूनतम 17 रुपये और अधिकतम लगभग 22 रुपये तक गया। यानी बदलाव बहुत ज्यादा नहीं हुआ।

 

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अब इसी को उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपने 1000 रुपये की SIP की है और औसतन 20 रुपये के NAV के साथ आपको हर महीने 50 यूनिट मिलती हैं। अब शेयर मार्केट डाउन होने पर अगर इसी म्यूचुअल फंड का NAV 18 रुपये हो गया तो 1000 रुपये में आपको 55.55 यूनिट मिल सकती हैं। इस तरह गिरावट के दौर में आप ज्यादा यूनिट खरीद सकते हैं। अब अगर आपने गिरावट के दौर में 3 महीने भी SIP रोक दी और सामान्य होने पर ही SIP शुरू की तो संभव है कि आप हर महीने 50 यूनिट खरीदते रहें। इसका असर यह होगा कि 9 महीने में आपके पास कुल 450 यूनिट ही इकट्ठा होंगी। वहीं, अगर आपने इन्हीं 3 महीने में SIP नहीं रोकी होतीं तो कम NAV के चलते आपको लगभग 55.55 यूनिट मिलतीं और आपके पास कुल 617 यूनिट होतीं।  

 

इस तरह अगर आप SIP जारी रखते हैं तो आपका साल भर का निवेश 12000 रुपये का होगा लेकिन SIP रोक देने पर सिर्फ 9000 रुपये का। इस तरह निवेश के मामले में भी आप पीछे हो सकते हैं। लंबे समय के हिसाब से देखा जाए तो मार्केट के हिसाब से SIP रोकना फायदेमंद नहीं माना जाता है। साथ ही, अगर आप SIP रोकते हैं और उन पैसों को कहीं निवेश करने के बजाय खर्च कर डालते हैं तो यह भी एक तरह से असेट का नुकसान माना जाता है।

रिसर्च, एक्सपर्ट और आंकड़े क्या कहते हैं?

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़े दिखाते हैं कि SIP स्टॉपेज रेशियो 2026 में काफी ज्यादा रहा है। इसके बावजूद SIP में निवेश होने वाली राशि अभी भी अच्छी खासी है और इसमें इजाफा हो रहा है। जनवरी 2026 में SIP स्टॉपेज रेशियो 74.83 प्रतिशत था यानी जितने लोगों ने नई SIP शुरू की उसकी तुलना में 74.83 प्रतिशत लोगों ने SIP बंद कर दी। मार्च अप्रैल में यह प्रतिशत 100 से भी ऊपर गया यानी SIP शुरू करने वालों की संख्या कम थी और बंद करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई।

 

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आंकड़े दिखा रहे हैं कि मार्केट में गिरावट के बावजूद SIP में निवेश बढ़ता जा रहा है। सितंबर 2026 में SIP में कुल निवेश 32,490 करोड़ था जबकि सितंबर 2025 में कुल 29361 करोड़ रुपये ही निवेश किए गए थे। यानी एक साल में शेयर मार्केट में हुई गिरावट के बावजूद एक साल बाद उसी महीने में 10.7 प्रतिशत ज्यादा निवेश हुआ। यह दिखाता है कि निवेशक भी इस बात को समझते हैं कि SIP में निवेश को मार्केट के घटने या बढ़ने के हिसाब से रोकना नहीं चाहिए। 

नोट: यह लेख किसी भी तरह के निवेश की सलाह नहीं देता है, यह सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिम के अधीन है। कहीं पर भी निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।