भारत से जो लोग जर्मनी में जाकर काम करना चाहते हैं वे वहां की कंपनियों में नौकरी और वीजा के नियमों को आसानी से समझ सकते हैं। जर्मनी में काम करने वाले लोगों की बहुत कमी है, और वहां भारतीय युवाओं के लिए नौकरी के अच्छे मौके हैं। जर्मनी में बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ रही है और काम करने वाले लोग कम हो रहे हैं जबकि भारत के पास युवा लोग हैं। इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और आईटी सेक्टर में भारतीय युवाओं के लिए नौकरी पाने के बहुत अच्छे अवसर हैं। जर्मनी जाने के लिए मुख्य रूप से दो रास्ते हैं जिसमें एक नेशनल एंप्लॉयमेंट वीजा है और दूसरा अपॉर्चुनिटी कार्ड यानी चांसेनकार्टे है।
जर्मनी में नौकरी करने के लिए वहां की किसी कंपनी का जॉब ऑफर होना जरूरी है। जब आपको जर्मनी की कंपनी से नौकरी मिल जाती है तब आप नेशनल एंप्लॉयमेंट वीजा के लिए फॉर्म भर सकते हैं। इस काम के लिए आपको अपने सभी कागज पहले से तैयार रखने होते हैं ताकि समय पर वीजा मिल सके।
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क्या है अपॉर्चुनिटी कार्ड?
अगर आपके पास पहले से नौकरी का ऑफर नहीं है तो भी आप जर्मनी सरकार के अपॉर्चुनिटी कार्ड यानी चांसेनकार्टे से वहां जा सकते हैं। इस कार्ड की मदद से सही लोग बिना नौकरी के सीधे जर्मनी जा सकते हैं और वहां जाकर अपनी पसंद की नौकरी ढूंढ सकते हैं। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें और पैसों का इंतजाम करना होता है और नौकरी मिलने के बाद इसे रहने की इजाजत यानी रेजिडेंस परमिट में बदला जा सकता है।
भारतीय लोगों को अपने इलाके के हिसाब से सही जर्मन ऑफिस में ही वीजा के लिए अर्जी देनी होती है। आप नई दिल्ली की जर्मन एंबेसी या फिर बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई के ऑफिस में आवेदन कर सकते हैं। कुछ जगहों पर फॉर्म जमा करने के लिए वीएफएस ग्लोबल जैसी कंपनियों की मदद लेनी पड़ती है और फॉर्म उसी दफ्तर में देना होता है जो आपके इलाके में आता है।
जरूरी कागज
वीजा के लिए अपॉइंटमेंट आमतौर पर लगभग 6 महीने पहले बुक किया जा सकता है। अपॉइंटमेंट के दिन आपके पास असली पासपोर्ट, नौकरी का ऑफर, पढ़ाई और काम के सभी सर्टिफिकेट और सही हेल्थ इंश्योरेंस होना चाहिए। इसके अलावा नेशनल वीजा का फॉर्म भरकर देना होता है और कुछ जरूरी कागजात भी जमा करने होते हैं।
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बड़ों के लिए वीजा की फीस 75 यूरो है और 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह फीस 37.5 यूरो है। पैसे जमा करने के नियम अलग-अलग जर्मन दफ्तरों में अलग हो सकते हैं जहां कुछ जगह डिमांड ड्राफ्ट चलते हैं तो कुछ जगह नकद पैसे लिए जाते हैं। नई दिल्ली की जर्मन एंबेसी में फॉर्म और बातचीत के बाद वीजा मिलने में लगभग 15 दिन का समय लगता है, हालांकि भीड़ या जांच की वजह से इसमें थोड़ा ज्यादा समय भी लग सकता है।
