दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलिवदा कह दिया। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। उसके बाद मेडिकल टीम को उनके गोवा वाले फ्लैट पर भेजा गया। उन्हें करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा। उनके अचानक चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।

 

नाना की आखिरी इच्छा था कि उनका अंतिम संस्कार पुणे वाले फार्महाउस पर हो। परिवार उनकी आखिरी इच्छा को पूरा कर रहा है। 27 एकड़ में फैले इस फार्महाउस में नाना अपना ज्यादातर समय बिताते थे। वह मुंबई की भागदौड़ वाली जिंदगी से दूर फार्महाउस पर सुकून के पल बिताते थे। वह यहां पर खेती करते थे। यहां वह गेंहू, चना और दालें उगाते थे।

 

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नाना पाटेकर को मिलेगा राजकीय सम्मान

नाना पाटेकर की संस्था पानी बचाने का काम करती थी। उनकी संस्था नाम फाउंडेशन के सीईओ गणेश थोरात ने कहा, 'पार्थिव शरीर को करीब 5 बजे पुणे लाया जाएगा और अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।'

 

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने ट्वीट कर लिखा, 'मराठी नाटकों के साथ- साथ मराठी और हिंदी सिनेमा में अभिनेता नाना पाटेकर का बेमिसाल योगदान देखते हुए हमने उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने का फैसला लिया है।' उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, नाना पाटेकर जी का जाना कला की दुनिया के लिए बहुत बड़ी क्षति है। येओला की गलियों से निकलकर अपनी प्रतिभा के दम पर मराठी थिएटर, मराठी और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। उनके निधन पर मेरी, महाराष्ट्र सरकार की और सांस्कृतिक मामलों के विभाग की ओर से गहरी संवेदनाएं।

 

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नाना ने अपने करियर की शुरुआत साल 1978 में फिल्म 'गमन' से की थी। वह फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन ऐक्टर्स में से एक थे। उन्होंने तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीता था। उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है।