पिछले कई सालों से टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' लोगों को हंसाता आ रहा है। इस शो को लाखों लोग हर दिन देखते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं, इस शो से पहले 90 के दशक में एक ऐसा सीरियल आता था, जिसका कॉन्सेप्ट काफी हद तक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' जैसा था। उस सीरियल का नाम 'ये दुनिया है रंगीन' था। इस सीरियल में दिलीप जोशी ने अहम किरदार निभाया था। यह सीरियल 1999 में सोनी चैनल पर प्रसारित हुआ था।


'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' का पहला एपिसोड 28 जुलाई 2008 को प्रसारित हुआ था। तब से लेकर आज तक इस सीरियल का हर एपिसोड सब टीवी पर लगातार प्रसारित हो रहा है। आज भी इस सीरियल को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं। हालांकि, इस सीरियल की मुख्य किरदार निभाने वाली दिशा वकानी के शो छोड़ने के बाद इसकी लोकप्रियता पहले की तुलना में कुछ कम हुई है। जानकारी के लिए बता दें, 'ये दुनिया है रंगीन' सीरियल 1999 में सोनी चैनल पर आया था। अब सवाल उठता है कि दोनों सीरियल में क्या समानता है?

 

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दोनों सीरियल में समानता


'ये दुनिया है रंगीन' नाम का सीरियल 1999 से 2000 के बीच सोनी चैनल पर टेलीकास्ट हुआ था। इस सीरियल को असित कुमार मोदी की प्रोडक्शन टीम ने बनाया था। यह हर सोमवार शाम 7:30 बजे प्रसारित होता था। यह भी 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की तरह एक कॉमेडी सीरियल था।


जिस प्रकार 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में गोकुलधाम सोसाइटी और उसमें रहने वाले अलग-अलग संस्कृति व धर्म के लोग दिखाए गए हैं, उसी प्रकार 'ये दुनिया है रंगीन' में मुंबई की एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी दिखाई गई थी, जहां अलग-अलग धर्मों के परिवार रहते थे।

 

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दोनों ही सीरियल में सोसाइटी के पड़ोसियों के बीच की हंसी-मजाक, आपसी नोकझोंक और पारिवारिक माहौल को दिखाया गया है। सबसे रोचक बात यह है कि दोनों ही सीरियल में काफी हद तक मिलती-जुलती सोसाइटी का कॉन्सेप्ट देखने को मिलता है।दिलीप जोशी का अहम किरदार


'ये दुनिया है रंगीन' सीरियल में दिलीप जोशी ने रीमाक नाम का किरदार निभाया था, जो आज 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में जेठालाल के किरदार में नजर आते हैं। दिलीप जोशी के अलावा अभिनेता शरद सांकला, जो इस समय 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में अब्दुल का किरदार निभा रहे हैं, वे 'ये दुनिया है रंगीन' में दयाशंकर पांडे का किरदार निभा रहे थे। वहीं बलविंदर सिंह, जिन्होंने संधू का किरदार निभाया था, उन्होंने रोशन सिंह की भूमिका भी निभाई थी।

 

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यह सीरियल सिर्फ एक साल तक ही टीवी पर प्रसारित हुआ था। कई जानकारों का मानना है कि असित कुमार मोदी ने इसी सीरियल के कॉन्सेप्ट को आधार बनाकर 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' बनाया। दोनों सीरियल के निर्माता असित कुमार मोदी ही हैं।