लाल सागर के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सऊदी अरब की चुनौतियां बढ़ने लगी है। सोमवार की रात सऊदी अरब के दो सुपरटैंकरों पर होर्मुज में हमला किया गया। इन जहाजों पर ओमान के तट के करीब मिसाइल से हमला किया गया। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि इन हमलों के पीछे कौन है।
यूनाइटेड किंगडम की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी ने भी एक टैंकर पर हमले की पुष्टि की। इसके अलावा ईरानी मीडिया ने भी होर्मुज के दक्षिणी तट पर एक सऊदी तेल टैंकर को रोकने का दावा किया।
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करीब एक महीने बाद अमेरिका ने ईरान के लरक द्वीप पर हमला किया। जवाब में ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। आईआरजीसी ने होर्मुज पर नियंत्रण मजबूत कर दिया है। उसकी इच्छा के विरुद्ध गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया जा रहा है।
शिपिंग इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग फर्म मारिस्क के मुताबिक ओमान के खासब से करीब 16.6 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में सिद्र टैंकर पर मिसाइल से हमला किया गया। जहाज पर सऊदी अरब का झंडा लगा था।
इसके कुछ देर बाद ही वीएलसीसी सेनेगल प्रॉस्पेरिटी जहाज पर तीन मिसाइलों से अटैक किया गया। गनीमत की बात यह है कि जहाज पर सवार चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। इस जहाज पर लाइबेरिया का झंडा लगा था।
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ओमान साइड पर किए गए यह हमले तनाव बढ़ने का संकेत है, जबकि ओमान और ईरान के बीच बातचीत के माध्यम से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की वार्ता चल रही है।
अमेरिका ने पहले सैन्य रणनीति के जरिये होर्मुज को खुलवाने का प्रयास किया। जब बात नहीं बनी तो आर्थिक दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। अभी तक अमेरिका को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। दूसरी तरफ ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अपना नियंत्रण बढ़ा दिया है। 20 जुलाई से सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी चल रही है।
