लेबनान में इजरायल की भीषण बमबारी के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद कर दिया है। ईरान ने यह भी कहा कि इजरायल के हमले अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन है। उधर, अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस का कहना है कि अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का कोई सबूत नहीं है।
इस बीच लेबनान में इजरायली हमले में 22 लोगों की जान गई है। शुक्रवार को भी 150 से अधिक स्थानों पर आईडीएफ ने बमबारी की थी। 47 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लेबनान में इजरायल के बढ़ते हमलों के कारण अमेरिका और ईरान का समझौता खतरे में पड़ गया है, क्योंकि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी भी समझौते की शर्त में शामिल है।
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आगे कदम उठाएंगे: ईरान
ईरान के खातम-अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने सरकारी टीवी पर कहा, 'यह घोषणा की जाती है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया जाएगा। यह ध्यान दिया जाए कि यह पहला कदम दुश्मन द्वारा किए गए वादे के उल्लंघन का जवाब है। अगर यह आक्रामकता जारी रहती है तो दुश्मन को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए मजबूर करने के मकसद से आगे के कदम उठाए जाएंगे।'
अमेरिका के भारी दबाव के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच शुक्रवार शाम 4 बजे युद्धविराम लागू हुआ। कुछ घंटे बाद यह टूट भी गया। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर ड्रोन और फाइटर जेट से बमबारी भी की। लेबनान की नागरिक रक्षा एजेंसी के मुताबिक सबसे अधिक 16 लोगों की मौत नबातीह जिले में हुई। 12 अन्य लोग घायल हैं। वहीं कफर रेमन गांव में एक लेबनानी सैनिक की मौत हुई है।
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एक की परिवार के चार लोगों की मौत
बेका घाटी पर भी इजरायली हमले की खबर है। यहां एक शख्स की जान गई। उधर, बेरूत के दक्षिण में स्थित टायर जिले में माता-पिता और दो बच्चों की मौत इजरायली हमले में हुई है। बता दें कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक विशाल भूभाग पर कब्जा कर लिया है।
समझौते के मुताबिक ईरान न केवल इजरायली सैनिकों की वापसी, बल्कि हमलों को भी रोकना चाहता है। अमेरिका ने इजरायल पर दबाव भी बनाया, लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हाल में अपनी सेना को लेबनान से वापस नहीं बुलाएगा।


