फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे नाम के देश की खूब चर्चा रही है। इसकी वजह यह है कि इस अजनबी सी टीम ने विश्व कप के शीर्ष दावेदारों में शामिल स्पेन को ड्रॉ पर रोककर अपना चमत्कारिक प्रदर्शन दिखाया। तब से हर कोई इस देश के बारे में जानना चाहता है। यह देश बेहद छोटा है। इसकी आबादी भी बेहद कम है। अफ्रीका महाद्वीप में जरूर बसा है, लेकिन दिखता यूरोप जैसा है। आधिकारिक नाम काबो वर्डे रिपब्लिक है। मगर दुनिया केप वर्डे के नाम से भी जानती है।

 

काबो वर्डे मध्य अटलांटिक महासागर में स्थित है। यह 10 ज्वालामुखीय द्वीपों से बना है। इसका क्षेत्रफल उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ और गोंडा जैसे जिलों के बराबर हैं। सभी 10 द्वीपों का कुल क्षेत्रफल करीब 4,033 वर्ग किलोमीटर है। अफ्रीफा महाद्वीप से काबो वर्डे की दूरी करीब 500 किलोमीटर की है। अफ्रीका के अन्य देशों की तुलना में यहां लोकतंत्र और अधिक स्थिर सरकारों का चलन है।

 

 

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आईएनई 2021 की जनगणना के मुताबिक काबो वर्डे की आबादी करीब 494000 है। देश में प्राकृतिक संसाधन बेहद सीमित है। अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही टिकी है। देश की जीडीपी का करीब 20 फीसद हिस्सा पर्यटन से आता है। देश में महज 11 फीसद भूमि पर भी खेती-बाड़ी होती है। 

 

 

काबो बर्डे की अर्थव्यवस्था आयातित पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भर है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, लकड़ी आदि के अलावा ऊर्जा का कोई अन्य सोर्स नहीं है। अधिकांश घरों में लकड़ी से खाना बनता है। देश में छोटे पैमाने पर उद्योग धंधे मौजूद हैं। देश लगातार तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में निवेश करके अपनी आय भी बढ़ा रहा है। 

 

कहां-कहां से होती है कमाई?

  • सेवा क्षेत्र
  • पर्यटन
  • मत्स्य पालन
  • प्रवासी नागरिकों से आने वाला धन

 

काबो वर्डे के 9 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं। एक द्वीप एकदम निर्जन है। सैंटियागो द्वीप पर स्थित प्राया यहां देश की राजधानी है। पुर्तगाली यहां की आधिकारिक भाषा है, लेकिन बोलचाल में क्रियोल बोली जाती है। क्रियोल भाषा पुर्तगाली और अफ्रीकी शब्दों को मिलकर बनी है। देश की अधिकांश आबादी रोमन कैथोलिक है। एक चौथाई से अधिक आबादी की उम्र 15 वर्ष से कम है। इतनी ही संख्या 15 से 29 साल के लोगों की है। देश की अधिकांश आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। गांव लगातार खाली होते जा रहे हैं।

 

कैसी है यहां की संस्कृति?

काबो वर्डे में आपको पुर्तगाली और अफ्रीका संकृति की झलक एक ही जगह पर मिल जाएगी। यही वजह है कि बड़ी संख्या में यूरोप से पर्यटक यहां हर साल आते हैं। सेंटियागो द्वीप पर स्थित Cidade Velha शहर को यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। 

दुनिया में विख्यात 'मोर्ना' संगीत

केप वर्डे की गायिका सेजारिया एवोरा के 'मोर्ना' संगीत विश्वप्रसिद्ध हैं। हालांकि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। केप वर्डे में मोर्ना और फुनाना नाम से दो संगीत परंपराएं हैं। मोर्ना संगीत यूनेस्को के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का भी हिस्सा है। यह के तरह का बिरह संगीत है। उन लोगों की कहानी को बयां करते हैं, जो किसी कारण अपना देश छोड़कर चले गए है। ठीक वैसे ही जैसे भारत में गिरमिटया समुदाय के गीतों का चलन है। भारत की तरह केप वर्डे में भी संगीत जीवन का अहम हिस्सा है। हर कामकाज में लोग संगीत कार्यक्रमों का आयोजन जरूर करते हैं।

 

फुटबॉल की दीवानगी

आपको यह जानकार हैरान होगी कि काबो वर्डे की आबादी से भी अधिक उसके नागरिक विदेश में रहते हैं। खासकर फ्रांस, पुर्तगाल और अमेरिका में। फुटबॉल यहां का सबसे लोकप्रिय खेल है। 2026 में काबो बर्डे की फुटबॉल टीम ने पहली बार विश्व कप क्वालिफाई किया करके फीफा में अपना जलवा दिखाया।

द्वीपों से जुड़े रोचक तथ्य

काबो वर्डे के सभी 10 द्वीप दो समूह बारलावेंटो और सोटावेंटो में बंटे हैं। साल द्वीप पर्यटन और समुद्र तट की खातिर प्रसिद्ध है। सैंटियागो यहां का सबसे बड़ा द्वीप है। बोआ विस्टा में रेतीले समुद्र तट हैं। फोगो द्वीप इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी वाला द्वीप है।

 

500 वर्षों की गुलामी के बाद मिली आजादी

1456 में पुर्तगाली नाविकों ने काबो वर्ड के 10 द्वीपों को खोजा था। तब यहां कोई नहीं रहता था। 1495 में पुर्तगाल ने इसे अपना उपनिवेश बनाया। करीब 500 साल की गुलामी के बाद 5 जुलाई 1975 में काबो वर्डे को पुर्तगाल से आजादी मिली। बता दें कि एक समय काबो वर्डे दास व्यापार का सबसे अहम केंद्र था। यहां से लोगों को गुलाम बनाकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया जाता था। यहां आपको यह बताना जरूरी है कि केप वर्डे को आजादी खूनी संग्राम के बाद मिली। यहां के नेता अमिलकार काब्राल ने गिनी-बिसाउ के आजादी आंदोलन से मिलकर वर्षों तक खूनी संघर्ष किया था।

पर्यटकों पर निर्भर अर्थव्यवस्था

केप वर्डे की आबादी लगभग 4.94 करोड़ है। जबकि यहां 2024 में 12 लाख पर्यटक पहुंचे। मतलब दोगुनी आबादी से भी अधिक।  देश की कमाई का लगभग एक चौथाई हिस्सा पर्यटन से आता है। दुनियाभर में 20 लाख से अधिक केप वर्डे के नागरिक बसे है। यह संख्या उसके देश से चार गुनी है।

 

बहुदलीय चुनावी प्रणाली

करीब 15 साल तक केप वर्डे की शासन व्यवस्था एक दलीय थी। हालांकि 1990 में इसमें बदलाव हुआ और बहुदलीय व्यवस्था को लागू किया गया। अगले साल यानी 1991 में पहली बार कई दलों ने चुनाव में हिस्सा लिया। केप वर्डे की जनता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सांसदों का चयन करती है। मौजूदा समय में जोस मारिया नेवेस ने केप वर्डे के राष्ट्रपति हैं।

 

भौगोलिक स्थिति और जलवायु

केप वर्डे में मीठे पानी का कोई बड़ा स्रोत नहीं है। डिसैलिनेशन प्लांट से समुद्र को खरे पानी को मीठे में बदलकर इस्तेमाल किया जाता है। देश की जलवायु ऐसी ही की यहां वर्षों तक सूखा पड़ता है। इस कारण से 11 फीसदी जमीन पर होने वाली खेतीबाड़ी हमेशा संकट में रहती है। देश में न कोई नदी है और न ही झील। देश का अधिकांश भूभाग ज्वालामुखी से बना है। इस कारण समतल जमीन कम है। अधिकांश भूभाग ऊबड़-खाबड़ है।