नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारी तबाही मच गई थी। इस आपदा के दौरान मिट्टी, कीचड़ और मलबे के नीचे लगातार 3 दिनों तक फंसी रहने वाली 6 साल की एक मासूम बच्ची को सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
रसुवा इलाके में बहुत बड़ी बाढ़ और भूस्खलन आया था जिससे चारों तरफ बर्बादी हुई थी। इस भयानक आपदा की चपेट में आने से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ था, रास्ते बंद हो गए थे और वहां के हालात काफी खराब हो गए थे। आपदा के बाद पुलिस, सुरक्षाकर्मी और राहत और बचाव दल के लोग वहां पर लगातार मलबा हटाने और गायब हुए लोगों को ढूंढने के काम में पूरी तरह से जुटे हुए थे। जब वे लोग मलबा हटा रहे थे उसी समय बचाव दल के लोगों को अचानक मलबे के ढेर के भीतर से एक बच्चे के रोने और होने की आवाज सुनाई दी।
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तीन दिनों तक मलबे के नीचे फंसे रहना
वह छोटी बच्ची पूरे तीन दिनों यानी लगभग 60 घंटों तक उस भारी मलबे, मिट्टी और कीचड़ के नीचे दबी रही थी। इतने लंबे समय तक बिना कुछ खाए-पिए, बिना पानी के और अंधेरे में रहने के बावजूद उस बच्ची की जान बच गई। जैसे ही बचाव दल के लोगों को मलबे के अंदर से उसकी आवाज सुनाई दी उन्होंने बिना एक पल भी देर किए तुरंत काम शुरू कर दिया और बहुत सावधानी से मिट्टी, कीचड़ और पत्थर हटाकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने के तुरंत बाद उस 6 साल की बच्ची को तुरंत पास ही बने थिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट पर ले जाया गया। वहां पर डॉक्टरों और मेडिकल टीम ने तुरंत उसकी जांच की और उसे पहली मेडिकल मदद दी ताकि उसकी तबीयत ठीक हो सके और उसे आराम मिल सके।
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काठमांडू अस्पताल में इलाज
जिस दिन बच्ची को बचाया गया उस दिन शाम और रात हो गई थी और मौसम भी बहुत ज्यादा खराब था। इस बड़ी वजह से उसे तुरंत किसी बड़े और दूर के अस्पताल में नहीं भेजा जा सका था। अगली सुबह जब मौसम ठीक हुआ तब उसे पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। जिसके बाद उसे नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक बड़े अस्पताल में ले जाया गया अभी वह बच्ची वहीं पर है और बड़े डॉक्टरों की कड़ी देखरेख में उसका इलाज चल रहा है। इस आपदा के दौरान देश भर में अब तक 675 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं और 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
