बांग्लादेश और भारत के संबंधों से जुड़ी परीक्षा की एक नई घड़ी आ चुकी है। तारिक रहमान ने जब शपथ ग्रहण किया था तब भारत उन्हें अपने यहां आने का न्योता देने वाला पहला देश था। मगर तारिक रहमान ने भारत की जगह मलेशिया जाना अधिक उचित समझा। उस वक्त ऐसा कहा गया कि शायद तारिक रहमान चीन और भारत की प्रतिद्वंद्विता में नहीं पड़ना चाहते हैं। 

 

अब भारत ने दूसरी बार उन्हें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भेजा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 23 से 25 अगस्त के बीच तारिक रहमान भारत आ सकते हैं। इस रिपोर्ट के कुछ ही देर बाद तारिक रहमान के प्रेस सचिव अबू अब्दुल्ला एम सालेह ने शुक्रवार को कहा कि अभी तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया।

 

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भारत ने तारिक रहमान के साथ मोहम्मद यूनुस की तरह व्यवहार नहीं किया। यूनुस भारत आना चाहते थे, लेकिन दिल्ली ने उन्हें कभी न्योता नहीं भेजा। जबकि तारिक रहमान के साथ भारत ने पहले ही दिन से गर्मजोशी के साथ बेहतर रिश्तों की पहल की।

 

दिसंबर 2025 में जब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया का निधन हुआ तो भारत ने विदेश मंत्री एस.जयशंकर को ढाका भेजा। शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे। उम्मीद जताई जा रही थी कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के वक्त आई रिश्तों में खटास रहमान के आने से खत्म हो जाएगी, लेकिन 5 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह उम्मीद भी तोड़ दी। 

भारत और बांग्लादेश के बीच कहां फंसा पेच

हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश ने कड़ी नाराजगी जताई और भारत के सामने उनके प्रत्यर्पण की मांग दोहराई। भारत ने स्पष्ट किया कि हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस निजी कार्यक्रम था। उनके विचारों का भारत सरकार समर्थन नहीं करती है। 16 अगस्त को बांग्लादेश ने न केवल शेख हसीना समेत अन्य आरोपियों को प्रत्यर्पित करने की मांग की, बल्कि छात्र नेता उस्मान हादी के हत्यारों को भी सौंपने का अनुरोध किया। पूर्व पीएम शेख हसीना दिसंबर तक बांग्लादेश जाने की बात कह चुकी हैं। बांग्लादेश इसी बात पर भारत से नाराज है। उसका आरोप है कि नई दिल्ली शेख हसीना को मंच प्रदान कर रही है।

किसका इंतजार कर रहा बांग्लादेश?

तारिक रहमान ने अभी तक भारत यात्रा पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। बांग्लादेश वेट एंड वाच के मूड में है। वह हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत के जवाब के इंतजार में है। एक बार 'हां या न' में जवाब आने के बाद बांग्लादेश अपनी नई चाल चलेगा। इसकी झलक बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम के बयान में भी दिखती है। उनका कहना है कि हम उनके (भारत) जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

 

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अभी भारत आने से क्यों बच रहे तारिक रहमान?

बांग्लादेश विदेश मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत की यात्रा पर कई हफ्तों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चली, लेकिन यह पहल 5 अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूषित हो गई। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भारत आना चाहते हैं, लेकिन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों में उनके शामिल होने का इरादा नहीं है। 

 

तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर का कहना है, 'पहली यात्रा द्विपक्षीय होनी चाहिए। न कि ब्रिक्स या संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे बहुपक्षीय मंचों की। इस बयान से साफ है कि ब्रिक्स सम्मेलन के आसपास भारत आने से तारिक रहमान बच रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनकी भारत यात्रा अंतरराष्ट्रीय मंचों से इतर और द्विपक्षीय आधार पर हो।

रिश्तों को कैसे सुधारने में जुटा भारत?

शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारत पड़ोसी बांग्लादेश के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने की हर कोशिश कर रहा है। हाल ही में ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने तारिक रहमान से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन वह दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। मंगलवार को दिनेश त्रिवेदी ने कहा, 'यहां प्रधानमंत्री (तारिक रहमान) से मुलाकात के बाद मैं सीधे दिल्ली गया और वहां हमारे प्रधानमंत्री से मेरी एक शानदार मुलाकात हुई। उन्होंने (पीएम मोदी) सिर्फ एक बात कही, हमें मिलना होगा।'

 

भारत ने तारिक रहमान के दिल्ली पहुंचने पर जोरदार स्वागत का आश्वासन दिया और कहा कि यह एक यादगार दौरा होगा। ढाका में दिनेश त्रिवेदी ने पीएम मोदी के शब्दों का उल्लेख किया और कहा, 'आप मेरी तरफ से उन्हें बता सकते हैं कि आपको भारत के प्रधानमंत्री का आश्वासन प्राप्त है कि जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भारत की यात्रा करेंगे तो उनका उतना ही सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा, जितने के वे हकदार हैं। यह एक यादगार दौरा होगा।'

दोनों देशों के बीच किन-किन मुद्दों पर टकराव?

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी शुक्रवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्र के लिए न्योता भेजा जा चुका है। हालांकि गुरुवार को तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने यह कहकर पारा बढ़ा दिया कि बांग्लादेश भी अपने हितों के लिहाज से मक्का समझौते में शामिल हो सकता है। कबीर का यह बयान भारत के लिहाज से बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ढाका में पाकिस्तान और तुर्की के दखल से भारत पहले से ही सतर्क है।

 

तुर्की का बढ़ता प्रभाव: चीन, पाकिस्तान और तुर्की की मदद से बांग्लादेश अपनी सेना को आधुनिक बनाने में जुटा है। तुर्की ड्रोन से तोपखाने तक की मदद पहुंचा रहा है। पिछले कुछ महीनों में तुर्की और बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया। पिछले महीने ही बांग्लादेश के सेना प्रमुख भी तुर्की गए थे।

 

चीन का दखल: तारिक रहमान की सरकार ने तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में चीन को शामिल किया है। यह प्रोजेक्ट भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक है। यह नदी परियोजना 9000 करोड़ की है। चीन 7000 करोड़ का सॉफ्ट लोन देगा। बांग्लादेश में चीन के दखल से भारत चिंतित है। पूरे घटनाक्रम पर नई दिल्ली की निगाह है।

 

गंगा जल संधि: 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई गंगा जल संधि इसी साल दिसंबर में उस वक्त खत्म होगी, जब शेख हसीना ढाका वापसी करेंगी। अब बांग्लादेश नई संधि में गारंटी की शर्त जोड़ने की मांग कर रहा है। राजधानी ढाका में बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने खुद यह बात कही। अभी तक भारत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मुद्दा भी तनाव की वजह हो सकता है।

 

हसीना की वापसी: शेख हसीना बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं। बांग्लादेश उनका भारत से प्रत्यर्पण चाहता है। दोनों देशों के बीच तनाव की यह भी एक वजह है। घरेलू मोर्चे पर घिरने से बचने की खातिर तारिक रहमान की सरकार अपना विरोध दर्ज करा रही है। दिसंबर तक चीजें और साफ होंगी। 

 

नया बांग्लादेश: बांग्लादेश का कहना है कि आज की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं और भारत को उसे समझना होगा। लेकिन भारत बदलाव हुए बांग्लादेश को इतनी आसानी से स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं है, क्योंकि उसके साथ सुरक्षा और रणनीतिक हित जुड़े हैं। हुमायूं कबीर का कहना है, 'अगर भारत वाकई संबंधों को दोबारा स्थापित करना चाहता है तो उसे आज के बांग्लादेश को समझना होगा। आज के बांग्लादेश में शेख हसीना या उनकी पार्टी जैसी कोई आतंकवादी संस्था मौजूद नहीं है।'