पाकिस्तान की सेना पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में मानवसंहार करने पर उतर आई है। सोमवार और मंगलवार को पाकिस्तान सेना ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे फायरिंग की। 24 घंटे में 30 लोगों को मार डाला। 5 जून के बाद से मरने वालों का कुल आंकड़ा 70 के पार पहुंच चुका है। 

 

अधिकांश प्रदर्शनकारी सेना की गोली का शिकार बने हैं। बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। उन्हें अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है। पाकिस्तान की सेना कश्मीरियों के घरों में घुसकर उनकी महिलाओं को बेइज्जत कर रही है। सोशल मीडिया पर जबरन कार्रवाई और सीधे फायरिंग के कई वीडियो वायरल है। कुछ महिलाओं ने वीडियो जारी करके भारत से भी मदद मांगी। 

 

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पिछले एक महीने से पीओजेके में इंटरनेट बंद है। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर रखा है। किसी को बाहर जाने की इजाजत नहीं है। मीडिया की एंट्री बैन है। पीओजेके में विरोध प्रदर्शन करने की अगुवाई करने वाला संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) पिछले साल से लोगों के आर्थिक और सियासी अधिकारों की आवाज उठा रहा है। 

 

इतना ही नहीं पाकिस्तान की सेना और सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल रखा है। संगठन का कहना है कि सोमवार को हुई फायरिंग में 25 लोगों की जान गई और मंगलावर को पांच लोगों को गोली मारी गई। दो दिन में 30 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में आइये समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, पाकिस्तान की सेना मांगों को मानने की जगह क्रूरता पर क्यों उतरी है?

क्या है जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी?

पूरे मामले को समझने से पहले जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बारे में जान लेते हैं। साल 2023 में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का गठन किया गया। इस सगंठन में छात्र, वकील, व्यापारी समेत अनेक यूनियन शामिल है। संगठन स्थानीय लोगों के अधिकारों की न केवल वकालत करता है, बल्कि सियासी और आर्थिक मुद्दों को भी पुरजोर तरीके से उठाता है।

 

 


पिछले एक साल में संगठन ने कई आंदोलन किए और सरकारी दमन का शिकार बना। जून महीने में ही रावलाकोट में पाकिस्तान सेना ने सीधा फायरिंग की। इसमें संगठन के 11 कार्यकर्ताओं की जान गई और 70 लोग घायल हुए। 

संगठन के प्रमुख चेहरे

  • शौकत नवाज मीर- संयोजक 
  • उमर नजीर- वरिष्ठ नेता
  • हफीज हमदानी- प्रवक्ता
  • इम्तियाज असलम- वरिष्ठ नेता

 

किस तरह के मुद्दे उठाती है जेएएसी?

जेएएसी ने शुरुआत में भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार का मुद्दा उठाया। आटे और अन्य जरूरी वस्तुओं में राहत व आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। बिजली सस्ती करने और सरकारी खर्च में कटौती की वकालत की। नेताओं के वीवीआईपी कल्चर को खत्म करने की मांग की।

 

मौजूदा मांग क्या है: जेएएसी की मौजूदा मांग है कि पीओजेके में आरक्षित उन 12 सीटों को खत्म किया जाए, जिन्हें 1947 के बाद भारत से आए कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित किया गया है। संगठन का तर्क है कि यह कश्मीरी पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। उनका पीओजेके से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में इन सीटों का प्रतिनिधित्व स्थानीय लोगों को मिले, ताकि कश्मीरियों की आवाज मजबूत हो। 

 

 

 

 

पाकिस्तान सरकार क्यों नहीं मान रही: 12 सीटों का गणित स्थानीय सरकार में पाकिस्तान की पकड़ मजबूत करता है। इन सीटों के सहारे ही इस्लामाबाद स्थानीय सरकार को अपने हिसाब से प्रभावित करती है। अगर इन सीटों को खत्म कर दिया गया तो स्थानीय सरकार में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर हो जाएगी। जबकि जेएएसी का तर्क है कि इससे स्थानीय लोगों की आवाज कमजोर हो रही है। हर फैसलों पर इस्लामाबाद का दखल अधिक बढ़ रहा है।  

जब टूटा बातचीत का सिलसिला

पाकिस्तान की सरकार ने पहले जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से बातचीत की। मगर यह सिलसिला मई में टूट गया। जून महीने में रावलाकोट में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने बड़ा प्रदर्शन किया। जवाब में पाकिस्तान सेना ने हिंसा का रास्ता चुना और प्रदर्शनकारियों पर भीषण गोलीबारी की। 11 निहत्थे लोगों को मौत के घाट उतार दिया। एक अन्य आंकड़े में दावा किया गया कि पूरे जून महीने में 40 लोगों की जान गई। 

पाकिस्तान ने चुना दमन का रास्ता

5 जून को पाकिस्तान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच दोबारा बातचीत हुई। मगर विधायिका के गठन पर सहमत नहीं बन सकी। इसी दिन सरकार ने 27 जुलाई को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। जवाब में जॉइंट एक्शन कमेटी ने 9 जून को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। अचानक पाकिस्तान सरकार ने 12 जून तक इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सिग्नल को बंद कर दिया। 

 

5 जून को एक एडवाइजरी जारी की गई। इसमें पर्यटकों से 20 जून तक इलाके की यात्रा न करने की सलाह और वहां मौजूद बाहरी लोगों से तुरंत निकलने को कहा गया। पूरे पीओजेके में अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई। मीडिया की एंट्री रोक दी गई। रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को गिरफ्तार किया जाने लगा। पूरे इलाके को सील कर दिया गया। 

 

5 ही जून को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया। इन सभी कार्रवाइयों से साफ होने लगा था कि पाकिस्तान की सेना आंदोलन को कुचलने के मूड में है। पूरे आंदोलन में पांच जून ही सबसे निर्णायक तारीख बनी। हजारों की संख्या में कश्मीरी सड़क पर उतर आए। पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी की। भारत से खुली मदद मांगी। 

 

पाकिस्तान की सेना ने छह और सात जून को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के खिलाफ दमनकारी एक्शन शुरू किया। संगठन से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। बड़ी संख्या में लोगों को गायब किए जाने लगा। संगठन का मुख्यालय सील कर दिया। इसी बीच पुलिस ने संगठन से जुड़े शाहजब हबीब की गोली मारकर हत्या कर दी। स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान के फर्जी चुनाव का बहिष्कार किया।

 

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। जैसे ही प्रदर्शनकारी 27 और 28 जुलाई को आगे बढ़े तो पाकिस्तान की पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों ने रास्ते में घेरकर प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की। मीरपुर में सबसे दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। यहां सड़क पर बड़ी संख्या में बाइक और लाशें पड़ी हैं। प्रदर्शनकारियों को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।

 

30 लोगों की मौत और सेना के दमन के बावजूद जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के सुर धीमा नहीं पड़ा है। कमेटी का कहना है कि अगर एक शख्स भी जिंदा बचा तो वह मुजफ्फराबाद तक पहुंचेगा।

 

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कब-कब कुचला गया जेएएसी का आंदोलन?

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक 2024 में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने लॉन्ग मार्च का आयोजन किया था। पाकिस्तान ने घातक बल का इस्तेमाल किया। इसमें तीन प्रदर्शनकारी और एक पुलिस अधिकारी की जान गई।

 

  • 2025 के अक्टूबर महीने में सरकार ने दोबारा आंदोलन किया। इस बार भी दमन झेलना पड़ा। पुलिस कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारियों की जान गई। झड़प में तीन पुलिसवाले भी मारे गए।

 

  • जून 2026 में रावलाकोट और आसपास पाकिस्तान पुलिस ने हिंसा का सहारा लिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सीधे फायरिंग की। जेएएसी के मुताबिक पुलिस ने 40 लोगों की हत्या की।