भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के 4 दिवसीय दौरे पर गए पीएम मोदी के लिए ये दौरे नए नहीं हैं लेकिन रिश्तों में नयापन रखने की कोशिशें जारी हैं। मौका भले ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक का है लेकिन एक देश का मुखिया दूसरे देश में जाए तो द्विपक्षीय बातचीत भी हो ही जाती है। इसी क्रम में पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके हैं। वह SCO की मीटिंग के इतर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे। कारण है कि भारत के संबंध दोनों देशों से अच्छे रहे हैं और इन देशों से अच्छा-खासा कारोबार भी होता रहा है। यूरेनियम जैसे अहम मिनरल के लिए भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध बेहद अहम हैं।

 

भारत के लिए ये देश एक बाजार की तरह भी हैं। हजारों भारतीय छात्र इन देशों में पढ़ाई करते हैं। उज्बेकिस्तान के लिए भारत एक ऐसा देश है जहां वह अपना यूरेनियम बेचता है और भारत का काम आसान हो जाता है। इसके अलावा, ये दोनों ही देश यूरेनियम के अलावा सोना, प्राकृतिक गैस और अन्य संसाधनों से परिपूर्ण हैं जो भारत के काम आ सकते हैं।

क्यों अहम हैं ये दोनों देश?

भारत अपने फार्मा प्रोडक्ट, कपड़े, जहाज, केमिकल्स और कई अन्य चीजें किर्गिस्तान को बेचता है। 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच 12 करोड़ डॉलर का ही था। हालांकि, दोनों ही देश इस बात पर सहमत हैं कि इसे अभी कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इस व्यापार के अलावा कम से कम 20 हजार भारतीय छात्र किर्गिस्तान में पढ़ाई भी कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने वहां जाते हैं।

 

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उज्बेकिस्तान की बात करें तो दोनों देशों का आपसी कारोबार पहले ही 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक इसे 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उज्बेकिस्तान भारत से गाड़ियों के पुर्जे, दवाएं, मैकेनिकल इक्विपमेंट और कई अन्य चीजें खरीदता है।

 

भारत यूरेनियम और थोरियम भी उज्बेकिस्तान से खरीदता है। 2024 में तो उज्बेकिस्तान ने अपने यूरेनियम-थोरियम का ज्यादातर हिस्सा भारत को ही बेचा और भारत ने इसके लिए 4.86 करोड़ डॉलर चुकाए। इस बार पीएम मोदी के दौरे पर भी इसी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है।

कहां हैं ये दोनों देश?

ये दोनों एशिया के ही देश हैं। उज्बेकिस्तान के एक तरफ तुर्कमेनिस्तान है, कुछ सीमा अफगानिस्तान से भी लगती है। पूर्व में ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान हैं और उत्तर में कजाकिस्तान की सीमाएं लगती हैं। वहीं, किर्गिस्तान के पूर्व में चीन और उत्तर में कजाकिस्तान और पश्चिम में उज्बेकिस्तान है। इसके दक्षिण में ताजिकिस्तान है।

 

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अगर आप भारत से देखें तो ये दोनों ही देश उत्तर-पश्चिम में हैं। उज्बेकिस्तान भारत से लगभग 2678 किलोमीटर तो किर्गिस्तान लगभग 2340 किलोमीटर दूर है। यानी अगर कश्मीर से नापा जाए तो किर्गिस्तान और कन्याकुमारी लगभग बराबर दूरी पर ही पड़ेंगे।

कितनी बार किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान जा चुके PM मोदी?

पिछले 12 साल में वह तीन बार किर्गिस्तान तो 4 बार उज्बेकिस्तान की यात्रा पर जा चुके हैं। साल 2015 में वह इन दोनों देशों की यात्रा पर गए थे। 2016 में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति इस्लाम कारिमोव के निधन के बाद भी पीएम मोदी वहां गए थे। यह उनका दूसरा उज्बेकिस्तान दौरा था। फिर 2019 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान गए थे। 2022 में SCO की बैठक उज्बेकिस्तान में हुए तो पीएम मोदी फिर से उसमें शामिल होने पहुंचे।

 

उनका मौजूदा दौरा भी SCO से ही जुड़ा हुआ है। इस बार SCO की मीटिंग किर्गिस्तान में हो रही है और पीएम मोदी उसमें हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। इतना ही नहीं, इसी के साथ-साथ वह उज्बेकिस्तान के दौरे पर भी गए हैं।