कहीं रेप, कहीं हत्या, 2012 से 2026 तक, UP में कितने बदले अपराध के आंकड़े?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर जनसभा में दावा कर रहे हैं कि यूपी अपराध मुक्त है, राज्य से माफिया भाग रहे हैं या सरेंडर कर रहे हैं। अपराध के आंकड़े अलग स्थिति बयां कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, Photo Credit: ANI
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
, समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के 'गुंडा' और 'माफिया' राज बताते हैं। उनका दावा कि माफियाओं को यूपी सरकार मिट्टी में मिला देती है, माफिया या तो प्रदेश छोड़कर भाग जाते हैं या पुलिस के सामने सरेंडर कर देते हैं। 29 अगस्त को ही उन्होंने दावा किया कि यूपी माफिया-मुक्त हो चुका है। जो माफिया सिर उठाएगा, फिर मिट्टी में मिलेगा। 29 अगस्त से लेकर अब तक के आंकड़े देखें तो तस्वीर अलग नजर आ रही है।
यूपी में अपराध की स्थिति क्या है, इसे सिर्फ 3 मामलों से समझा जा सकता है। एक मामला शामली का है, जहां सिंगर अमित बालियान की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा का है, जहां एक सिरफिरे ने 6 साल की बच्ची के साथ रेप के बाद उसे मार डाला। तीसरा मामला भी ग्रेटर नोएडा से है, जहां चलती स्लीपर बस में एक लड़की के साथ गैंगरेप हुआ है। ये सभी मामले, अगस्त के आखिरी हफ्तों के हैं।
यह भी पढ़ें: 293 गुना ज्यादा अपराध, ढाई गुना कम है पुलिस, स्पेन की तुलना में कहां है गोरखपुर?
3 अपराध, जिनकी चर्चा देशभर में हुई
- शामली, 26 अगस्त 2026: हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की शामली कोतवाली क्षेत्र के आर्यपुरी इलाके में जिम से बाहर निकलते समय दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। चार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसके बाद वे मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में मृत घोषित कर दिए गए। पुलिस ने सघन तलाशी अभियान चलाया। पांच दिन बाद 31 अगस्त की सुबह मुठभेड़ में दो मुख्य शूटर सुमित और मोहित ढेर हो गए। दोनों हरियाणा के सोनीपत के बताए गए। पुलिस के मुताबिक दोनों गोगी गैंग से जुड़े थे। मुठभेड़ में 2 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। जांच में साजिश, होटल में रेकी और अंतरराज्यीय संपर्क के संकेत मिले हैं। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
- ग्रेटर नोएडा, 28 अगस्त 2026: ईकोटेक क्षेत्र के हल्दौनी गांव में 6 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई। घरवालों ने लापता होने की सूचना दी, जिसके बाद शव मिला। आरोपी बलराज उर्फ बल्ला पर बच्ची को बहला-फुसलाकर ले जाने और फिर जघन्य अपराध करने का आरोप है। वह रेप के बाद बच्ची को बोरी में भरकर फेंक भी आया था। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश दिखा। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया। हथियार बरामदगी के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें बलराज घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। जांच में उसका पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया।
- ग्रेटर नोएडा-दिल्ली, 4 अगस्त 2026: परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट जा रही एक निजी स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की घटना सामने आई। पीड़िता मैनपुरी की है। भारी बारिश में वह रास्ता भटककर परी चौक पहुंची, जहां खाली बस में बैठा लिया गया। करीब 47 किलोमीटर के सफर में ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप पर आरोप लगा। पीड़िता की शिकायत पर पॉक्सो व संबंधित धाराओं में मामला दर्ज हुआ। दोनों आरोपी गिरफ्तार किए गए और बस जब्त की गई। निजी बसों की सुरक्षा, जीपीएस और रूट चेकिंग को लेकर नए निर्देश जारी किए गए।
यह भी पढ़ें: इंटरपोल, नोटिस, समझौते, कई इंतजाम फिर भी देश में प्रत्यर्पण मुश्किल क्यों है?
3 मामले, राज्य में अपराध की स्थिति दर्शाने के लिए काफी हैं या नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। साल 2012 से लेकर 2017 वह मुख्तमंत्री रहे। 2017 से 2026 तक, सूबे की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। वह अखिलेश यादव के कार्यकाल को जंगलराज बताते हैं, गुंडा-माफियाओं का राज बताते हैं। क्या वाकई स्थिति ऐसी थी, आइए समझते हैं-
2013 में कैसे थे आंकड़े?
अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बन चुके थे। मायावती के बाद अब उनके हाथों में सूबे की कमान थी। NCRB की 'क्राइम इन इंडिया 2013' रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश बच्चों के खिलाफ अपराधों में देश में सबसे आगे था। पूरे देश में बच्चों के खिलाफ दर्ज कुल मामलों में यूपी की हिस्सेदारी 16.9 प्रतिशत थी, जबकि 2012 में यह आंकड़ा 15.80 प्रतिशत था। बच्चों की हत्या के मामलों में भी यूपी सबसे ऊपर था। धारा 302 और 315 के तहत देश भर में कुल 1,739 मामले दर्ज हुए, जिनमें से अकेले उत्तर प्रदेश में 492 मामले आए। यह देश के कुल मामलों का 28.3 प्रतिशत था।
बच्चों की हत्या के (धारा 315) के देश के 82 मामलों में से 10 मामले यूपी में दर्ज हुए। बच्चों से बलात्कार के मामलों में मध्य प्रदेश (2,112) और महाराष्ट्र (1,546) के बाद उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर रहा, जहां 1,381 मामले दर्ज किए गए। बच्चों के अपहरण में यूपी देश में सबसे ऊपर था। धारा 363 से 373 के तहत राज्य में 6,002 मामले दर्ज हुए, जो देश के कुल मामलों का 21.3 प्रतिशत है।
यह भी पढ़ें: देश में पहली बार 1 लाख के पार पहुंचे साइबर क्राइम केस, एक साल में 18% बढ़े मामले
2017 में क्या आंकड़े थे?
अखिलेश यादव की कार्यकाल का आखिरी साल था। 2017 में देश भर में महिलाओं के खिलाफ दर्ज कुल मामलों में सर्वाधिक 56,011 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि देश में हुई कुल हत्याओं में से सबसे अधिक 4,324 हत्या के मामले भी इसी राज्य से सामने आए। राज्य 4,971 साइबर अपराधों जिनमें मुख्य रूप से वित्तीय धोखाधड़ी शामिल थी। अनुसूचित जातियों के विरुद्ध दर्ज 11,444 अत्याचार के मामलों के साथ भी पहले नंबर पर रहा।
2022 के आंकड़े क्या थे?
NCRB की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में उस साल कुल 7 लाख 53 हजार 675 संज्ञेय अपराध दर्ज हुए। इनमें करीब 4 लाख आईपीसी और 3.5 लाख विशेष कानूनों के मामले थे। राज्य की अपराध दर 322 प्रति लाख रही, जबकि देश की औसत दर 422 थी। महिलाओं के खिलाफ 65,743 मामले दर्ज हुए, जिनमें प्रताड़ना, अपहरण, दुष्कर्म और दहेज हत्या शामिल हैं, लेकिन महिला अपराध दर 58.6 रही, जो राष्ट्रीय औसत 66.4 से कम है।
अदालतों में पैरवी के बाद महिला अपराधों में सजा दर 70.8 प्रतिशत रही और इस मामले में उत्तर प्रदेश बड़े राज्यों में सबसे आगे था। राज्य में 3,491 हत्याएं समेत 52,579 हिंसक अपराध और बच्चों के खिलाफ 18,682 मामले दर्ज हुए, जिनमें पॉक्सो के 8,136 मामले भी शामिल हैं। बच्चों के मामलों में सजा दर 68.3 प्रतिशत रही। पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत 38,094 मामलों में कार्रवाई कर 31,739 अवैध हथियार जब्त किए।
यह भी पढ़ें: हर दिन जान गंवाती 15 'त्विशा', कानून हैं, अदालतें भी, फिर कैसे छूटते हैं आरोपी?
क्या सच में कम हुए हैं अपराध?
उत्तर प्रदेश में 2024 में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम रही। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार देशभर में प्रति लाख आबादी पर 252.3 अपराध हुए जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर सिर्फ 180.2 रही, जो राष्ट्रीय औसत से करीब 28.5 प्रतिशत कम है। आबादी ज्यादा होने की वजह से राज्य में कुल अपराधों की संख्या सबसे अधिक 4 लाख 30 हजार 552 दर्ज हुई, लेकिन प्रति व्यक्ति अपराध के हिसाब से प्रदेश 21वें स्थान पर रहा। केरल में यह दर 513 और दिल्ली में 1258.5 रही, जबकि तेलंगाना, हरियाणा, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी उत्तर प्रदेश से ज्यादा अपराध दर दर्ज की गई। 2023 में भी उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत कम थी। राज्य में चार्जशीट दर 76.7 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से थोड़ी बेहतर है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिसिंग में सुधार, तकनीकी निगरानी और संगठित अपराध पर कार्रवाई से यह स्थिति बनी है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




