डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है। 2023 में The Lancet Diabetes & Endocrinology की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 101 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित है और 136 मिलियन लोगों को प्रीडायबिटीज है। ये एक बहुत बड़ी आबादी की ओर भी इशारा करते हैं जिन्हें इस बीमारी से जुड़ी दिक्कतों को समझने की जरूरत है।

 

ज्यादातर डायबिटीक मरीज इंसुलिन, शुगर लेवल और डाइट के बारे में बात करते हैं लेकिन इस बात पर ध्यान देते कि इसका असर अंगों पर भी पड़ता है। यह आपके आंख, लिवर, दिल से लेकर किडनी तक को प्रभावित करता है। इसके अलावा कुछ लोगों को पाचन से जुड़ी समस्याएं होती हैं क्योंकि उनके पेट को कंट्रोल करने वाली नसें ठीक से काम नहीं करती हैं। ये नुकसान अचानक से नहीं होता है। इसका असर धीरे-धीरे पड़ता है। हम आपको उन अंगों के बारे में बता रहे हैं जो डायबिटीज की वजह से प्रभावित होते हैं।

 

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शरीर के इन अंगों पर पड़ता है असर

पैर में दर्द का महसूस न होना

 

पेरिफेरल न्यूरोपैथी तब होती है जब लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर से नसें डैमेज हो जाती है। शुरुआत में व्यक्ति को जलन, झुनझुनी और सुई चुभने का ऐहसास महसूस हो सकता है। कुछ लोगों के पैर की उंगलियों और पैरों में सेसेशन खत्म हो जाता है। इस वजह से अजीब समस्या होती है। दर्द जो हमें बताता है कि किसी नुकसानदायक चीज से दूर हो जाना चाहिए। ये चीज काम करना बंद कर देती है। व्यक्ति छाले के साथ घूम सकता है, किसी नुकीली चीज पर पैर रख सकता है या ठीक से फिट न होने वाले जूते से घाव हो सकता है।

 

सही सेंसेशन के बिना, चोट का पता नहीं चल सकता है। खराब सर्कुलेशन और देर से ठीक होने से मामला और बिगड़ सकता है। US नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) का अनुमान है कि डायबिटीज वाले लगभग एक-तिहाई से आधे लोगों को पेरिफेरल न्यूरोपैथी होती है।

 

आंखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ता है

 

डायबिटीज के मरीज को रेटिनोपैथी की समस्या हो सकती है। यह कंडिशन रेटिना पर असर डालती है जो आंख के पीछे लाइट सेंसिटिव टिशू होता है। इसकी छोटी ब्लड वेसल लंबे तक हाई ब्लड शुगर की वजह से कमजोर हो सकती है। वे लीक हो सकती हैं, ब्लॉक हो सकती हैं या नई असामान्य वेसल के बनने को ट्रिगर कर सकती हैं। 2021 में Ophthalmology में पब्लिश हुई रिपोर्ट के मुताबिक डायबिटीज वाले 22.27% लोगों में कुछ हद तक डायबिटीक रेटिनोपैथी थी। शुरुआत में आंखों की रोशनी पर ज्यादा असर नहीं पड़ता हैं। कंडीशन खराब होने पर नजर धुंधली हो जाती, गंभीर मामलों में नजर कमजोर हो जाती है। इसलिए रेगुलर आंखें चेकअप करवानी जरूरी है।

 

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किडनी पर असर पड़ता है

 

डायबिटीज की वजह से किडनी की क्षमता कम होने लगती है। डायबिटीक मरीज को क्रोनिक किडनी डिजीज और गंभीर मामले मेंं किडनी फेलियर भी हो सकता है। CDC के मुताबिक डायबिटीज वाले 3 में से 1 व्यक्ति को क्रोनिक किडनी डिजीज है।

 

हृदय से जुड़ी बीमारी और स्ट्रोक का खतरा

 

हाई शुगर की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो सकती है जिसकी वजह से हृदय की धमनियां संकरी हो जाती है। इस वजह से ब्लड सर्कुलेट होेने में परेशानी होती है। कई लोगों को ब्लॉकेज की समस्या भी होती है। CDC के मुताबिक शुगर के मरीजों में हृदय रोग  और उससे होने वाली बीमारियों का खतरा दोगुना बढ़ जाता है।

 

दिमाग को चुकानी पड़ती है कीमत


डायबिटीज की वजह से डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। स्टडी के मुताबिक इसमें कई प्रोसेस शामिल हो सकते हैं, जिसमें दिमाग को सप्लाई करने वाली ब्लड वेसल को नुकसान, सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े मेटाबोलिक बदलाव शामिल हैं। डिमेंशिया पर 2024 के लैंसेट कमीशन ने डायबिटीज को डिमेंशिया से जुड़े मॉडिफाइड रिस्क फैक्टर्स में शामिल किया। इसका मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज वाले हर किसी को याददाश्त की समस्या होगी। इसका मतलब यह है कि डायबिटीज को उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की हेल्थ के बारे में बड़ी चर्चा का हिस्सा होना चाहिए।