आज हमारी जिंदगी पहले के मुकाबले काफी बदल गई है। पहले घरों में रहने का तरीका अलग था और रोजमर्रा के काम भी अलग तरह से किए जाते थे। लोगों के मिलने-जुलने से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाली चीजों तक बहुत कुछ समय के साथ बदल गया है। इसके बावजूद हमारे आसपास आज भी ऐसी कई चीजें हैं जो पुराने समय से चली आ रही हैं। नमस्ते करना, साड़ी पहनना, चूड़ी-बिंदी लगाना, चारपाई और घर का आंगन आज भी किसी न किसी रूप में देखने को मिल जाता है।
पहले ये चीजें लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा हुआ करती थीं। चारपाई पर बैठना और सोना आम था, घर में आंगन होता था और दूर रहने वाले लोगों से बात करने के लिए चिट्ठी लिखी जाती थी। अब समय बदलने के साथ इन चीजों का इस्तेमाल भी कम या अलग हो गया है। कहीं चारपाई की जगह बेड ने ले ली तो कहीं आंगन की जगह बालकनी और छोटी खुली जगह ने ले ली। ऐसे ही कई पुरानी चीजें आज भी मौजूद हैं लेकिन उनका इस्तेमाल पहले से अलग तरीके से हो रहा है।
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नमस्ते करने का तरीका बदला
पुराने समय में लोगों के मिलने पर हाथ जोड़कर नमस्ते करना आम बात थी। खासकर बड़े-बुजुर्गों से मिलने पर दोनों हाथ जोड़कर सिर झुकाकर नमस्ते किया जाता था। इसे सामने वाले को सम्मान देने का तरीका माना जाता था। उस समय नमस्ते सिर्फ मिलने का तरीका नहीं था बल्कि इससे सामने वाले के प्रति सम्मान भी दिखाया जाता था।
आज भी लोग नमस्ते करते हैं लेकिन इसे करने का तरीका थोड़ा बदल गया है। अब कई लोग दोनों हाथ जोड़ने और सिर झुकाने के बजाय सिर्फ मुंह से “नमस्ते” बोल देते हैं। हालांकि बड़े-बुजुर्गों से मिलने या खास मौकों पर आज भी लोग हाथ जोड़कर नमस्ते करते हैं। यानी नमस्ते आज भी लोगों की जिंदगी में है लेकिन इसे करने का तरीका पहले की तुलना में बदल गया है।
चारपाई का इस्तेमाल बदला
पुराने समय में गांवों और घरों में चारपाई होना बहुत आम बात थी। चारपाई लकड़ी के ढांचे और रस्सियों से बनाई जाती थी। घर के लोग इस पर बैठते थे, आराम करते थे और रात में सोते भी थे। गर्मी के दिनों में कई लोग इसे घर के बाहर खुले में भी बिछा लेते थे। उस समय चारपाई घर की रोज की जरूरत हुआ करती थी।
आज भी गांवों में चारपाई देखने को मिल जाती है लेकिन शहरों में इसका इस्तेमाल काफी कम हो गया है। अब घरों में चारपाई की जगह बेड, सोफा और दूसरी चीजों ने ले ली है। कुछ जगहों पर लोग आज भी चारपाई रखते हैं और उस पर बैठते हैं। वहीं अब कुछ घरों में चारपाई को सजावट के तौर पर भी रखा जाता है। पहले चारपाई रोज की जरूरत थी लेकिन अब कई जगह इसका इस्तेमाल कम हो गया है और इसे घर में देसी लुक देने के लिए रखा जाता है।
साड़ी पहले कैसे पहनी जाती थी
साड़ी भारत में बहुत पुराने समय से महिलाओं के पहनावे का हिस्सा रही है। अलग-अलग जगहों पर साड़ी पहनने का तरीका भी अलग रहा है। पहले महिलाएं अपने इलाके और परिवार की परंपरा के हिसाब से साड़ी पहनती थीं। कई जगह साड़ी पहनने का एक खास तरीका था जिसे घर की बड़ी महिलाएं आगे आने वाली पीढ़ी को सिखाती थीं। साड़ी सिर्फ पहनने का कपड़ा नहीं थी बल्कि यह लोगों की परंपरा और रहन-सहन से भी जुड़ी हुई थी।
आज साड़ी पहनने का तरीका काफी बदल गया है। अब महिलाएं साड़ी को सिर्फ पारंपरिक तरीके से ही नहीं पहनतीं बल्कि इसे अलग-अलग चीजों के साथ स्टाइल भी करती हैं। कई जगह साड़ी के साथ बेल्ट, कोट और अलग तरह के ब्लाउज पहने जाते हैं। इससे साड़ी का पूरा लुक पहले से अलग नजर आता है। यानी साड़ी आज भी वही है लेकिन इसे पहनने और सजाने का तरीका समय के साथ बदल गया है।
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आंगन की जगह बदली
पुराने समय के भारतीय घरों में आंगन होना आम बात थी। कई घरों में आंगन घर के बीच में या सामने बना होता था। परिवार के लोग वहां बैठते थे और रोज के कई काम भी वहीं किए जाते थे। बच्चे आंगन में खेलते थे और घर के लोग साथ बैठकर समय बिताते थे। बड़े परिवारों के लिए आंगन घर का एक जरूरी हिस्सा हुआ करता था।
अब शहरों में घर छोटे होने और फ्लैट बढ़ने की वजह से अलग आंगन की जगह कम हो गई है। कई घरों में आंगन की जगह बालकनी, छत या छोटी खुली जगह होती है। हालांकि गांवों और पुराने बड़े घरों में आज भी आंगन देखने को मिलता है। यानी आंगन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है लेकिन अब पहले की तरह हर घर में इसके लिए अलग जगह नहीं होती।
