कपड़ो पर S, M, L, जैसे साइज का सिस्टम हमें बहुत आम लगता है लेकिन कभी आपने यह सोचने की कोशिश की है कि आखिर यह साइज सिस्टम कब और कहा से आया है? आपको बता दें कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी कहानी छिपी है। पहले के समय में S, M, L, साइज का कोई सिस्टम ही नहीं था। लोगों के कपड़े या तो दर्जी सिलता था या फिर घरेलूं महिलाएं सिलती थी।
आज लोगो को बिना इंतजार किए उन्हें उनके नाम के कपड़े मिल जाते हैं लेकिन पुराने समय में रेडिमेड जैसा कोई शब्द था ही नहीं। उस दौर में दर्जी हर एक व्यक्ति का नाप उनकी बॉडी के हिसाब से लेता था इसलिए उस समय S, M, L, जैसे साइजों की जरूरत नहीं होती थी और जिसके पास दर्जी को देने के लिए पैसे नहीं होते थे वह लोग अपने घर की महिलाओं से कपड़े सिलवाते थे।
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S, M, L, सिस्टम कब और कैसे शुरू हुआ?
19वीं सदी के अंत में कपड़ों का बड़े पैमाने पर कारखानों में उत्पादन शुरू हुआ। यह कहानी करीब 100-150 साल पुरानी है। अमेरिका में हुए गृहयुद्ध के दौरान देखा गया कि इतने सारे सैनिकों की एक ही ड्रेस कैसे बन सकती है। ऐसे में हर एक सैनिक को दर्जी के पास भेजकर नाप दिलवाना मुश्किल था। तभी कपड़ों के निर्माताओं ने सैनिकों के शरीर के नाप का एक बड़ा डेटा इकट्ठा किया। उन्होंने पाया कि पुरुषों के शरीर का साइज कुछ अलग पैटर्न का होता है। इसी के आधार पर पहली बार पुरुषों के साइज को स्मॉल, मीडियम और लार्ज में बांट दिया गया और यही से रेडीमेड कपड़ों की शुरूआत हुई।
महिलाओं का साइज सिस्टम
1930 के दशक तक महिलाओं के कपड़े दर्जी ही बनाते थे। 1939 में अमेरिकी सरकार के कृषि विभाग ने लगभग 15,000 महिलाओं के शरीर के 59 हिस्सों का नाप लिया ताकि एक स्टैंडर्ड साइज सबके लिए हो। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कारखानों में कपड़ों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। हालांकि हर एक ब्रांड का साइज अलग-अलग होता है क्योंकि सभी महिलाओं के बॉडी का स्ट्रक्चर अलग होता है।
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अलग-अलग देशों में कपड़ों के साइज अलग क्यों होते हैं?
कपड़ों के साइज को लेकर दुनिया भर में कोई एक समान नियम नहीं है। हर देश ने अपने लोगों की औसत शारीरिक बनावट और फैशन उद्योग की जरूरतों के अनुसार साइज तय किए हैं। इसी वजह से एक ही व्यक्ति का साइज अलग-अलग देशों में अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में किसी व्यक्ति का साइज "M" हो सकता है, जबकि वही व्यक्ति यूरोप या ब्रिटेन के ब्रांड में किसी दूसरे नंबर या साइज में फिट हो सकता है। महिलाओं के कपड़ों में यह अंतर और भी ज्यादा देखने को मिलता है।
इसके अलावा, कई कपड़े की कंपनियां भी अपने हिसाब से साइज तय करती हैं। यही कारण है कि एक ब्रांड का "Medium" दूसरे ब्रांड के "Medium" से थोड़ा बड़ा या छोटा हो सकता है। इसी कारण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऑनलाइन कपड़े खरीदते समय केवल S, M या L पर भरोसा करने के बजाय साइज चार्ट और शरीर की माप को जरूर देखना चाहिए। इससे सही फिटिंग वाले कपड़े चुनने में आसानी होती है और सामान वापस करने की परेशानी भी कम हो जाती है।
