सेप्सिस एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी से हर साल लाखों लोगों को मौत होती है। हर साल 13 सितंबर को वर्ल्ड सेप्सिस डे मनाया जाता है और इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। यह एक जानलेवा बीमारी है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक भारत में 10 में से लगभग 3 मौतें सेप्सिस के कारण हुईं। जबकि दुनियाभर में 5 में से एक मौत इसकी वजह से होती है। 2017 में 2.9 मिलियन लोगों की मौत सेप्सिस के कारण हुई थी। आइए जानते हैं इस जानलेवा बीमारी के बारे में जानते हैं।

 

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क्या होता है सेप्सिस?

सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसकी वजह से शरीर में जल्दी-जल्दी इंफेक्शन होने लगता है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर में इन्फेक्शन प्रतिरक्षा प्रणाली को काफी ज्यादा ऐक्टिव होती है जिसकी वजह से टिशू डैमेज, ऑर्गेन फेल और मौत तक हो सकती है। सेप्सिस के ट्रिगर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

 

इस बीमारी में जितना जल्दी ट्रीटमेंट शुरू हो जाए उतना अच्छा है। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति हो सकती है। 65 से ज्यादा उम्र के लोग, नवजात शिशु,प्रेग्नेंट महिलाएं, डायबिटीज, किडनी डिजीज, गंभीर चोट वाले लोगों में सेप्सिस का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

कब जानलेवा हो जाता है सेप्सिस?

सेप्सिस को तीन चरणों में बांटा गया है। 

 

सेप्सिस
सीवियर सेप्सिस
सेप्टिक शॉक

 

सेप्सिस सबसे पहला चरण है जिसमें इम्यून सिस्टम किसी संक्रमण के प्रति अधिक रिस्पॉन्स करता है और हेल्दी सेल्स पर हमला करता है। इसके कारण शरीर में इन्फ्लेमेशन होता है। सही समय पर इलाज नहीं मिलना पर यही स्थिति गंभीर हो जाती है और ऑर्गन फेलियर का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ मामलों में मरीज को सेप्टिक शॉक आता है और उसके बाद 12 घंटे के अंदर व्यक्ति की मौत हो जाती है।

सेप्सिस के लक्षण क्या हैं?

  • लो ब्लड प्रेशर
  • तेज हार्ट बीट
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार
  • कांपना
  • ठंड लगाना
  • यूरिन संबंधी समस्याएं
  • एनर्जी की कमी
  • अधिक पसीना आना
  • भ्रम की स्थिति

यह बीमारी मुख्य रूप से बैक्टीरिया की वजह से होती है। हालांकि यह फंगल, पैरासाइट, वायरल इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है। गंभीर मामले में मरीज को स्पेटिक शॉक भी हो सकता है।

 

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सेप्सिस की पहचान कैसे करें?

अगर किसी मरीज में ये लक्षण नजर आ रहे हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सेप्सिस की पहचान के लिए फिजिकल टेस्ट, एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ऑक्सीजन लेवल समेत अन्य टेस्ट किए जाते हैं। सेप्सिस का इलाज तुरंत शुरू कर देना चाहिए।

सेप्सिस के कैसे करें बचाव?

  • हाथ धोने को प्रैक्टिस में लाना।
  • घाव को साफ रखना और ठीक होने तक ढककर रखना।
  • जरूरी टीकों को समय पर लगवाना।
  • संक्रमण होने पर उसका नियंत्रण सबसे जरूरी है।