भारत में इस साल मानसून में सामान्य से कम बारिश हुई। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य 868.6 मिलीमीटर से करीब 13 फीसदी कम है। 2001 के बाद यह मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है। IMD के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय महापात्रा ने एक बयान में कहा कि अगर कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी।
IMD के मुताबिक, इस साल कम बारिश की एक बड़ी वजह जून में प्रशांत महासागर में बनी अल नीनो की स्थिति रही। मानसून की वापसी के बारे में उन्होंने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।
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13 फीसदी कम हुई बारिश
IMD के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल जून से सितंबर तक देश में कुल 759.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिमी मानी जाती है। ऐसे में देखा जाए तो पूरे मानसून सीजन में 13 फीसदी कम बारिश हुई। इसके अलावा, अगर बात करें महीने की तो जून में सामान्य से 35.4 फीसदी, अगस्त में 16.3 फीसदी और सितंबर में 7.6 फीसदी कम बारिश हुई। जुलाई ही एकमात्र ऐसा महीना रहा, जब सामान्य से अधिक बारिश हुई और इस दौरान एक प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने क्या बताया?
डॉ. मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, अगर कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। इस मौसम में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और कुल 77 दिन कम दबाव की प्रणालियां सक्रिय रहीं, जबकि आमतौर पर ये करीब 57 दिन सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।
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IMD का पूर्वानुमान क्या था?
IMD ने 29 मई को जारी मानसून के पूर्वानुमान में कहा था कि इस साल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की 90 फीसदी रह सकती है। इसमें 4 फीसदी तक मॉडल की गलती की गुंजाइश थी। इससे पहले 13 अप्रैल को IMD ने मानसून में LPA की 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान लगाया था।
मानसून के दौरान बारिश की कमी की एक वजह अल नीनो की स्थिति भी मानी जा रही है। अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) नाम की जलवायु घटना के तीन चरणों में से एक है। इसका धरती पर गर्म असर पड़ता है, इसे भारत में कम मानसूनी बारिश से जोड़ा जाता है। वहीं, इसके उलट ला नीना का आमतौर पर ठंडा असर होता है, जबकि ENSO की तीसरी स्थिति तटस्थ होती है।
