दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मुख्य मांग है। बीते कुछ दिनों में लगातार यह देखा जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता और समर्थक लगातार कह रहे हैं कि उनकी मांगें मानी जाएंगी तभी आंदोलन खत्म होगा। सोमवार को हुए संसद मार्च के बाद इस आंदोलन का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले तीन मांगें रख रहे प्रदर्शनकारी अब कई और मांगें भी रख रहे हैं। इतना ही नहीं, पहले एकदम शांतिपूर्ण चल रहे प्रदर्शन में अब पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों के जवानों से मारपीट हो रही है। साथ ही साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री को खुलेआम गालियां भी दी जा रही हैं।
CJP के प्रवक्ताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और इसे बदनाम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ही ऐसे गुंडों को भेज रही है। CJP का कहना है कि एक महीने से उनका प्रदर्शन चल रहा है लेकिन कभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई। खबरगांव की टीम ने भी मौके पर जाकर यह देखा है कि सोमवार को हुए 'संसद मार्च' के बाद आक्रोश बढ़ गया है। छात्रों के घायल होने के चलते फैला गुस्सा अब अलग-अलग रूप में सामने आ रहा है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई रुझान नहीं आया है कि वह प्रदर्शनकारियों की मांग स्वीकार करेगी या नहीं।
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बदलती जा रही हैं मांगें
पहले प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, जिन बच्चों ने आत्महत्या की उनके परिवार को मुआवजा मिले और सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाए। अब जब सोनम वांगचुक सरकार अस्पताल से निकलकर प्राइवेट अस्पताल में आ गए हैं तो CJP ने मांग रखी है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई केस न हो। अभिजीत दीपके ने कहा है कि प्रदर्शन तभी खत्म होगा जब सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
अब एक और मांग रखी गई है कि जिन पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया उनके खिलाफ कार्रवाई हो। इतना ही नहीं, सोनम वांगचुक ने मांग की है कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में गंभीर चर्चा हो। साथ ही, आश्वासन दिया जाए कि अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ भविष्य में भी कोई केस न हो।
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बदसलूकी, बदतमीजी और हुड़दंग
सोमवार से पहले तक यह प्रदर्शन बिल्कुल शांत था। ना कभी पुलिस से कोई झड़प हुई, ना गाली-गलौज के वीडियो आए और ना ही मीडियाकर्मियों से मारपीट की गई। सोमवार को हुए संसद मार्च में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद मीडियाकर्मी भी निशाना बनाए जा रहे हैं। कई चैनलों के पत्रकारों से बदसलूकी और मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। खबरगांव की टीम से भी कुछ लोगों ने मारपीट की। इतना ही नहीं, अब पूरे परिसर में बार-बार हुड़दंग भी होने लगा है और वहां मौजूद भीड़ पुलिस के साथ-साथ प्रदर्शन का मैनेजमेंट देख रहे लोगों की बात भी नहीं सुन रही है।
इन चीजों का नकारात्मक असर आंदोलन की छवि पर पड़ रहा है और गलत संदेश जा रहा है। कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों से अपील भी की है कि वे शांतिपूर्ण तरीका ही अपनाएं। हालांकि, हुड़दंग और मारपीट की बातों को अभिजीत दीपके ने यह कहकर खारिज किया है कि ये सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है।
