दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार अब 2500 करोड़ रुपये का लोन लेने जा रही है। रिपोर्टस के अनुसार, दिल्ली में पानी और सीवर की पुरानी समस्या को दूर करने के लिए सरकार अब बड़े स्तर पर सरकार खर्च करने का प्लान बना रही है। इसी प्लान के तहत दिल्ली सरकार ने केंद्र की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत 2,500 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त लोन का प्रावधान किया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार के इस प्लान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली की आधी आबादी पानी के कनेक्शन के बिना रह रही थी और कई इलाकों में 50 साल तक पुरानी सीवर लाइनें परेशानी का कारण बनी हुई थीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 2,500 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। दिल्ली के 2026-27 बजट में यह रकम साफ तौर पर दर्ज है। यह सामान्य कर्ज नहीं है, बल्कि केंद्र की ओर से पूंजीगत परियोजनाओं के लिए 50 साल की अवधि वाला ब्याज-मुक्त ऋण है।
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आखिर 2500 करोड़ की जरूरत क्यों पड़ी?
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सीवेज और पानी की आपूर्ति दिल्ली के लोगों के लिए हमेशा से बड़ी समस्याएं रही हैं। उन्होंने कहा, 'दिल्ली शहर अब सक्षम हाथों में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली सरकार बेहतर रणनीतिक योजना के जरिए दिल्ली की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है।'
सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक कई इलाकों में पानी की पाइपलाइन, सीवर और स्टोरेज सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की जरूरत है। खासतौर पर वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का कमांड एरिया महत्वपूर्ण है। दिल्ली जल बोर्ड के दस्तावेज के मुताबिक इस इलाके में करीब 26 लाख आबादी के लिए पानी की व्यवस्था बेहतर करने की योजना है। मौजूदा वजीराबाद प्लांट के तीन चरण 1965, 1972 और 1990 में शुरू हुए थे, यानी इसका एक बड़ा हिस्सा कई दशक पुराना है। बोर्ड ने नई 140 MGD क्षमता की WTP और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बताई है।
पैसा कहां खर्च होगा?
रेखा गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 2,500 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। उन्होंने इस राशि के इस्तेमाल के बारे में जानकारी देते हुए कहा, 'इस राशि का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) में पानी की आपूर्ति व्यवस्था में सुधार से जुड़े पैकेज-1 के लिए 805 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी है। इसी तरह, वजीराबाद WTP के कमांड एरिया में पानी की आपूर्ति सुधारने के लिए पैकेज-2 के तहत 935 करोड़ रुपये के कार्यों को भी मंजूरी दी गई है।'
इसके अलावा, अर्बन चैलेंज फंड के जरिए भी दिल्ली में कई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इस फंड के तहत परियोजना की कुल लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत राज्य सरकार अपने संसाधनों से देगी, जबकि बाकी 50 प्रतिशत राशि दिल्ली जल बोर्ड बाजार से लोन लेकर जुटाएगा। इसके साथ ही अर्बन चैलेंज फंड के माध्यम से दिल्ली में अंडरग्राउंड रिजर्वायर (UGR) का निर्माण, नई वाटर लाइन नेटवर्क की स्थापना और व्यापक DMA मीटरिंग सिस्टम लागू करने जैसी परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी। इन योजनाओं का उद्देश्य दिल्ली की पुरानी जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना, पानी की उपलब्धता और वितरण में सुधार करना तथा सप्लाई सिस्टम को व्यवस्थित बनाना है।
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क्या दिल्ली सरकार के पास नहीं है पैसा?
आमतौर पर लोन तब लिया जाता है जब पैसा खत्म हो जाए और दिल्ली सरकार के लोन लेने पर भी अब इस तरह के सवाल उठने लगे हैं कि क्या दिल्ली सरकार के पास पैसा खत्म हो गया है। लोन लेने की असल वजह यह है कि पानी और सीवर जैसी परियोजनाओं में शुरुआती पूंजी बहुत बड़ी होती है और इनका लाभ लंबे समय तक मिलता है। इसलिए सरकार बजट की सामान्य राशि खर्च करने के बजाय ब्याज-मुक्त लंबे कर्ज का इस्तेमाल कर रही है।
केंद्र की SASCI योजना का उद्देश्य ही राज्यों को बड़े कैपिटल प्रोजेक्ट तेजी से पूरा करने के लिए सस्ता वित्त उपलब्ध कराना है। दिल्ली में पुराने सिस्टम को बदलने, नई पाइपलाइन और सप्लाई सिस्टम को आधुनिक बनाने में खर्च होने वाला यह पैसा बड़ा खर्च है जिसका लाभ सालों तक मिलेगा। ऐसे में दिल्ली सरकार केंद्र सरकार की योजना का लाभ उठाकर ब्याज मुक्त लोन ले रही है।
