नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति प्रकाश चटर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की। एनसीपीआई के सांसद यूसुफ पठान का नाम इससे जुड़ा और दावा किया गया कि उन्होंने भी सर्वोच्च सम्मान देने की मांग उठाई। हालांकि बाद में यूसुफ पठान ने दावों का खंडन किया और लोगों से पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, 'बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और देश के लोग अपने वोट के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। ऐसे वक्त में क्या मैं किसी अवॉर्ड की सिफारिश करूंगा? मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा। मेरे नाम से कहानियां गढ़ने वालों से सिर्फ इतना कहना है, अगर पत्र है तो कॉपी पब्लिक कीजिए। सबूत दिखाइए, वरना इसे नकली और मेरे नाम का गलत इस्तेमाल समझिए। आज जरूरत अफवाह की नहीं, सच और जनता के हक की आवाज की है।'
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SIR पर पहले भी आवाज उठा चुके यूसुफ पठान
एसआईआर के मुद्दे पर यूसुफ पठान अपने एनसीपीआई के दो अन्य सांसद अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान के साथ 6 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। तीनों सांसदों ने गृह मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा था कि एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम कट गए हैं। इस कारण उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ, जमीन पंजीकरण, पासपोर्ट सत्यापन जैसे कामों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। तीनों सांसदों ने लंबित मामलों के जल्द निपटाने की मांग उठाई थी।
पार्टी अध्यक्ष ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
यूसुफ पठान अभी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा है। इसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति प्रकाश चटर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। पत्र में चटर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव आयोग की भूमिका की तारीफ की और कहा कि बिना किसी खून-खराबे और गड़बड़ी के चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके लिए उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग की।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद करीब 20 सांसदों ने बगावत का रास्ता चुना था। बाद में इन सांसदों ने एनसीपीआई का दामन थाम लिया। पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों में यूसुफ पठान भी थे। टीएमसी सांसदों के शामिल होने से पहले एनसीपीआई को बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि बाद में यह रातों-रात देशभर में चर्चा का केंद्र बनी।
