प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ऊर्जा संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारत की सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश की सौर क्षमता 2014 के करीब 2 गीगावाट से बढ़कर अब 160 गीगावाट तक पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साल 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य सरकार ने रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सूर्य घर योजना के जरिए घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई दुनिया बनाना आसान नहीं है। चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या डेटा सेंटर के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। नया युग ऊर्जा की मांग बढ़ा रहा है। इसलिए सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काफी काम किया है।
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भारत सौर ऊर्जा में कितनी दूर निकला?
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत अब तक 50 लाख घरों को जोड़ा जा चुका है। इस योजना में लोगों को छत पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रति परिवार 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलती है। हजारों उपभोक्ता अब इस बिजली से कमाई भी कर रहे हैं।'
'देश की सौर क्षमता अब 164.59 गीगावॉट'
केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देश की सौर ऊर्जा में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई है। जुलाई 2026 तक सौर क्षमता 164.59 गीगावॉट पहुंच गई, जो 2014 में सिर्फ 2.8 गीगावॉट थी। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 51.58 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लग चुका है और करीब 19 लाख परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं। नई प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएंगे।
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क्या कोयले की जगह ले पाएगा सौर ऊर्जा?
कोयला अभी भी ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। यह देश की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का करीब 55 प्रतिशत और बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत से ज्यादा पूरा करता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कोयला उत्पादन 1,040 मिलियन टन रहा। थर्मल पावर प्लांटों द्वारा कोयले का आयात घटकर 45.4 मिलियन टन रह गया है। सरकार ने कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है, जिससे हजारों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
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सौर ऊर्जा की चुनौतियां क्या हैं?
सौर ऊर्जा मिशन से जुड़े एक स्वंयसेवी अविकल त्रिपाठी बताते हैं, 'भारत में सोलर ऊर्जा का उत्पादन स्थानीय मांग से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। अतिरिक्त बिजली को न तो बैटरी में स्टोर किया जा सकता है और न ही पर्याप्त ट्रांसमिशन लाइनें होने से जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है। नतीजा यह है कि सोलर क्षमता बढ़ने के बावजूद कई जगह बिजली उत्पादन बंद करना पड़ रहा है।'
अविकल त्रिपाठी ने बताया, 'सबसे ज्यादा समस्या राजस्थान में है। यहां से देश की कुल सोलर क्षमता का 27 प्रतिशत हिस्सा आता है। यहां दिन के समय कम मांग की वजह से 80 प्रतिशत तक सोलर बिजली को रोकना पड़ता है। ऊर्जा है लेकिन स्टोर करने वाले सिस्टम में खामी है। ट्रांसमिशन लाइनों और बैटरी स्टोरेज की कमी की वजह से अतिरिक्त बिजली दूसरे राज्यों तक नहीं पहुंच पा रही। यह सोलर तकनीक की नहीं, बल्कि योजना, समन्वय और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से है।'
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सरकार क्या कर रही है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में बिजली की मांग बढ़ रही है, इसलिए सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, कोयला, पेट्रोलियम और नई तकनीकों पर जोर दे रही है।
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रिन्यूएबल एनर्जी के दूसरे कार्यक्रमों का हाल क्या है?
जुलाई 2026 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता करीब 552 गीगावॉट पहुंच गई है, जो 2014 में 249 गीगावॉट थी। इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 300.50 गीगावॉट हो गई है, जो कुल क्षमता का 54 प्रतिशत से ज्यादा है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
सौर ऊर्जा के अलावा, देश पवन ऊर्जा पर भी जोर दे रहा है। जो राज्य, पवन ऊर्जा के अनुकूल हैं, उनकी कुल क्षमता 58.14 गीगावॉट तक पहुंच गई है। पिछले साल रिकॉर्ड 6.05 गीगावॉट क्षमता बढ़ी है। बायो-एनर्जी, हाइड्रो पावर और ग्रीन हाइड्रोजन में भी अच्छी प्रगति हो रही है।
केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावॉट है और 2047 तक इसे 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य रखा गया है। जानकारों का कहना है कि अगर भारत ऊर्जा भंडारण की नीति सुधारे तो और बेहतर नतीजे आ सकते हैं।
