छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम में दी जाने वाली दवाओं को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। अब केंद्र सरकार ने इन दवाओं को लेकर नियम और सख्त कर दिए हैं। सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड से बनने वाली सभी फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन दवाओं को चार साल से कम उम्र के बच्चों को देने पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इन दवाओं का इस्तेमाल आमतौर पर नाक बहने, नाक बंद होने, छींक और सर्दी-जुकाम के लक्षणों में किया जाता है।
सरकार री ओर से जारी आदेश में निर्माताओं को दवा के लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर साफ चेतावनी लिखना भी अनिवार्य किया है कि यह दवाई चार साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चार साल से छोटे बच्चों के लिए बाजार में उपलब्ध हर तरह की कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मौजूदा आदेश खास तौर पर क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के कॉम्बिनेशन वाली दवाओं पर लागू है।
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क्यों लिया यह फैसला?
सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के मामले में सख्ती बरती है। हालांकि, यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है बल्कि इसको लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। 2023 में इन दवाओं का इस्तेमाल बच्चों के लिए करने पर सवाल उठे थे। अप्रैल 2025 में केंद्र ने इस संयोजन वाली कुछ FDC दवाओं पर प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू करते हुए चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चेतावनी देने को कहा था।
इसके बाद फरवरी 2026 में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने मामले की फिर समीक्षा की और इस बात पर सहमति जताई कि यह कॉम्बिनेशन चार साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अब अगस्त 2026 की नई अधिसूचना के जरिए दायरा बढ़ाकर इस कॉम्बिनेशन वाली सभी दवाओं को प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है, जिनमें भारत में बनाई गईं और इंपोर्ट की गई दवाएं भी शामिल हैं।
बच्चों की मौत के बाद सख्ती
खांसी-जुकाम की दवाओं पर बढ़ती सख्ती के पीछे 2025 की घटनाओं ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की मौतों की खबर सामने आई। जांच में कुछ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) जैसे जहरीले कैमिकल की मौजूदगी सामने आई, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने बाद में भारत में बने कुछ दूषित लिक्विड मेडिसिन को लेकर मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया, टेस्टिंग, सप्लाई चेन और बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देने जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसी दौरान केंद्र ने अक्टूबर 2025 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी थी कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ और कोल्ड मेडिसिन न तो लिखी जाए और न ही दी जाए, जबकि पांच साल तक के बच्चों में इनके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया था।
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लगातार सख्त हो रहे नियम
कफ सिरप की दवाओं में लापरवाही की खबरें सामने आने के बाद से लगातार सिरप वाली दवाओं की बिक्री को लेकर भी नियम सख्त किए जा रहे हैं। जून 2026 में ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव कर शेड्यूल K से सिरप को हटा दिया गया, जिसके बाद कफ सिरप समेत कई सिरप वाली दवाओं की बिक्री के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी हो गई। सरकार का मकसद बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने की आदत, गलत डोज और दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना है। इससे पहले दिसंबर 2025 में इस बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया गया था। वहीं, जनवरी 2026 में तमिलनाडु ने आलमंड किट कफ सिरप पर रोक लगा दी थी, क्योंकि जांच में उसमें एथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया था। बच्चों के माता-पिता को भी दवाई देने से पहले दवाई के लेबल देखना जरूरी है।
