तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट इन दिनों खूब चर्चा में है। वजह है एक कथित डेटा लीक का दावा। रैनसमवेयर ग्रुप वर्ल्ड लीक्स का कहना है कि उसने प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज डार्क वेब पर अपलोड कर दिए हैं। अगर इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के सिस्टम से किसी तरह की छेड़छाड़ होती है तो इसका असर पूरे दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जिसकी वजह से भारत के भी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी 19 हजार से ज्यादा संवेदनशील फाइलें डार्क वेब पर लीक होने का दावा किया जा रहा है। इनमें प्लांट के निर्माण से जुड़े कुछ तकनीकी दस्तावेज और ब्लूप्रिंट भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, NPCIL का कहना है कि परमाणु सुरक्षा, रिएक्टर कंट्रोल और दूसरे संवेनशील न्यूक्लियर सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिर भी इस घटना के बाद देश के अहम ऊर्जा ढ़ांचे की साइबर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

 

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कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट में क्या होता है?

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट बिना पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बड़ी मात्रा में साफ-सुथरी बिजली बनाता है। यहां कोयला या गैस जलाने की बजाय यूरेनियम के परमाणुओं को कंट्रोल तरीके से तोड़ा जाता है, जिसे न्यूक्लियर फिशन कहते हैं। इस प्रक्रिया से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। उसी गर्मी से पानी उबलकर हाई-प्रेशर भाप बनता है। फिर यही तेज भाप बड़े-बड़े टरबाइनों को घुमाती है, जिससे जेनरेटर चलता है और बिजली तैयार होती है।

कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर कितनी बिजली पैदा करता है?

भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा 23 जुलाई 2025 को लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट में फिलहाल दो रिएक्टर (यूनिट-1 और यूनिट-2) चालू हैं। दोनों की क्षमता 1,000-1,000 मेगावाट है, यानी यहां से कुल 2,000 मेगावाट बिजली बन रही है। यही बिजली दक्षिण भारत के कई राज्यों तक पहुंचाई जाती है।

 

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अब यहां यूनिट-3, 4, 5 और 6 का निर्माण भी चल रहा है। ये सभी शुरू हो जाने के बाद इस प्लांट की कुल क्षमता बढ़कर 6,000 मेगावाट हो जाएगी। इतनी बिजली से लाखों घरों की जरूरत पूरी की जा सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि परमाणु बिजलीघर से 24 घंटे लगातार बिजली मिलती है, क्योंकि यह धूप, हवा या मौसम पर निर्भर नहीं होता।

किन राज्यों को मिलती है कुडनकुलम प्लांट की बिजली?

लोकसभा में सरकार ने लिखित जवाब में बताया कि कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली का सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु को मिलता है। तमिलनाडु को 925 मेगावाट, कर्नाटक को 442 मेगावाट, केरल को 266 मेगावाट और पुडुचेरी को 67 मेगावाट बिजली दी जाती है। इसके अलावा 300 मेगावाट बिजली केंद्र सरकार अपनी दूसरी जरूरतों के लिए अपने पास रखती है।

 

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दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह क्यों है खास?

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट दक्षिण भारत के औद्योगिक विकास की बड़ी ताकत है। यहां बनने वाली बिजली का सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु को मिलता है, जिसे देश का ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब माना जाता है। चेन्नई के IT कॉरिडोर, कोयंबटूर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और बेंगलुरु के टेक पार्कों तक चौबीसों घंटे बिजली पहुंचाने में इस प्लांट की अहम भूमिका है। यही वजह है कि इन राज्यों में फैक्ट्रियां और बड़े उद्योग बिना रुकावट के काम कर पाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्लांट इन राज्यों को कोयले की कमी और महंगे ट्रांसपोर्ट खर्च से भी बचाता है। इससे सस्ती, भरोसेमंद और लगातार बिजली मिलती है, जो दक्षिण भारत में कारोबार और उद्योगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है।