राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय को क्लीन चिट मिल चुकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। गुरुवार से ही सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी वायरल है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह चंपत राय ने लिखी है। 9 पन्नों की इस चिट्ठी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रोचक बात है कि चंपत राय ने इस चिट्ठी के असली या नकली होने पर कुछ नहीं कहा है। शुक्रवार को जब इसी चिट्ठी के बारे में नृपेंद्र मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने कहा कि ऐसी कोई चिट्ठी उन्होंने नहीं देखी है। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि ये सारी बातें मीडिया की मनगढ़ंत हैं और मीडिया के लोग ही विवाद कराना चाहते हैं।
इसी चिट्ठी को लेकर अखबारों में खबरें भी छपी हैं लेकिन चंपत राय ने अपने मुंह से या अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर ऐसी बातें नहीं की हैं। अब इन्हीं बातों को लेकर समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरा है। सपा का कहना है कि दूध का दूध पानी का पानी करने का दावा करने वाले योगी आदित्यनाथ क्या राम मंदिर चोरी के धन में अपना हिस्सा लेकर शांत बैठ गए?
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क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?
इसी के बारे में सवाल पूछे जाने पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, 'कौन सा पत्र? मैंने ऐसा कोई पत्र देखा नहीं है। जब तक मैं पत्र देखूं नहीं तब तक मैं यही जवाब दूंगा कि यह आप लोगों की मनगढ़ंत गाथा होगी। शायद इस प्रकार का कोई पत्र नहीं है और इस प्रकार की कोई आलोचना नहीं की गई है। 9 पन्ने का भी हो सकता है लेकिन उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं की होगी। आप लोग हर जगह पर विवाद पैदा करना चाहते हैं इसीलिए इस तरह से मेरे सामने प्रस्तुतीकरण कर रहे हैं।'
चिट्ठी में क्या है?
सबसे पहले तो हम स्पष्ट कर दें कि यह चिट्ठी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है तो हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इस चिट्ठी में कथित तौर पर चंपत राय की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि निर्माण से जुड़े फैसलों में सारी भूमिका नृपेंद्र मिश्रा की थी और सारे फैसले वही लेते थए। आरोप लगाए गए हैं कि निर्माण के लिए L&T और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को चुनने का फैसला भी नृपेंद्र मिश्रा का ही था। इसमें यह भी लिखा गया है कि राम मंदिर का निर्माण समय से हो पाया इसके लिए नृपेंद्र मिश्रा ने ही प्रयास किए और कई मौकों पर बाधाएं दूर कीं।
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बता दें कि जब राम मंदिर चंदा चोरी का विवाद चर्चा में था तब नृपेंद्र मिश्रा ने भी कुछ सवाल उठाए थे और जांच का समर्थन किया था। उन्होंने चंदा चोरी की बात को 'कलंक' करार दिया था।
