दुनिया का नक्शा बहुत जल्द बदलने वाला है। भारत, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे 164 देशों ने 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव का समर्थन किया। अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध किया। वहीं एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।  नए मैप में अफ्रीका महाद्वीप के वास्तविक आकार को दिखाया जाएगा। अभी भारत का मैप भी उसके आकार के अनुरूप नहीं है। नए मैप में भारत का नक्शा पहले से बड़ा दिखेगा।

 

इस बीच भारत ने आगाह किया है कि संयुक्त राष्ट्र की पहल पर प्रस्तावित विश्व मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश के आधिकारिक मानचित्र के मुताबिक दिखाया जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया कि इनका कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं होगा।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि यह प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र, मानचित्रण पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण का समर्थन नहीं करता।

 

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उन्होंने कहा, 'भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और मतदान पर अपने स्पष्टीकरण में 'इक्वल एरिया' (भूभागों के क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बनाए रखने वाली) मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत पर जोर दिया।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख स्पष्ट और अडिग है। इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।'

 

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रणधीर जायसवाल ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी 'इक्वल एरिया' मानचित्रण पद्धतियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, जिनमें महाद्वीपों के भूभागों के आपसी क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बना रहता है। यह प्रस्ताव न तो किसी विशेष विश्व मानचित्र को अपनाता है और न ही उसे प्रमाणित करता है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम समेत राजनीतिक मानचित्रण से भी संबंधित नहीं है।'