केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में यानी अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ब्याज चुकाने में 5.15 लाख करोड़ खर्च कर दिए। यह पैसा आमतौर पर सरकार जो सब्सिडी देती है, उसपर होने वाले खर्च से करीब 2.75 गुना है। सीधे तौर पर कहें तो सरकार के हर 100 के खर्च में लगभग 25 सिर्फ पुराने कर्ज का ब्याज भरने में गए।
वहीं भारत सरकार का राजकोषीय घाटा भी बढ़ गया है। अगस्त 2026 के अंत तक यह पूरे साल के बजट अनुमान का करीब 42 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 38 प्रतिशत था। इसके पीछे की बड़ी वजह सब्सिडी पर बढ़ता खर्च और दूसरी वजह सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार बनाए रखी।
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ब्याज में खर्च हुआ सब्सिडी से ज्यादा पैसा
मुख्य सब्सिडी में सरकार राशन, खाद, रसोई गैस आदि पर दी जाने वाली छूट का खर्च गिनती है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच इस पर 1.87 लाख करोड़ खर्च हुए। इसी दौरान सरकार ने पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में 5,14,810 करोड़ रुपये दिए, यानी हर 100 खर्च में करीब 25 रुपये। ऐसे में देखा जाए तो ब्याज की यह रकम सब्सिडी से करीब 2.75 गुना है।
हालांकि, अगस्त 2025 तक ब्याज में 5.29 लाख करोड़ खर्च हुए थे यानी इस बार करीब 2.6% कम खर्च हुआ है। सरकार के खजाने का सबसे बड़ा हिस्सा आम लोगों को दी जाने वाली राहत पर नहीं, बल्कि कर्ज चुकाने पर जा रहा है।
सरकार के खजाने में कितना पैसा आया?
भारत सरकार के खजाने में अगस्त 2026 तक 5 महीनों में कुल 13,67,709 करोड़ रुपये आए, जो बजट अनुमान 2026-27 में तय कुल प्राप्तियों का 37.5% है। इसमें 8,37,921 करोड़ टैक्स से मिली कमाई, जिसे केंद्र सरकार का शुद्ध हिस्सा मानते हैं, 4,54,549 करोड़ टैक्स के अलावा दूसरे स्रोतों से मिली कमाई और 75,239 करोड़ कर्ज के अलावा पूंजीगत प्राप्तियां (गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां) से आया है।
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कितना हुआ खर्च?
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच केंद्र सरकार का कुल खर्च 20,77,958 करोड़ रहा, जो 2026-27 के बजट अनुमान का 38.9% है। इसमें से 15.68 लाख करोड़ राजस्व खाते पर यानी रोजमर्रा के कामों पर और 5.10 लाख करोड़ पूंजीगत खाते पर यानी संपत्ति बनाने के कामों पर खर्च हुए। ऐसे में देखा जाए तो कुल खर्च का करीब तीन-चौथाई हिस्सा रोजमर्रा के कामों में गया और एक-चौथाई निर्माण जैसे कामों में हुआ। खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज का रहा। सरकार ने पुराने कर्ज के ब्याज के रूप में 5,14,810 करोड़ रुपये चुकाए और सब्सिडी पर 1,87,037 करोड़) खर्च हुए।
कैसे बढ़ा राजकोषीय घाटा?
सरकार का मुख्य सब्सिडी पर खर्च पिछले साल की इसी अवधि के 1.50 लाख करोड़ रुपये से 24.4 प्रतिशत बढ़कर 1.87 लाख करोड़ रुपये हो गया। पूरे साल के लिए बजट में तय 4.11 लाख करोड़ रुपये में से सब्सिडी पर खर्च पहले ही 46 प्रतिशत हो गया है, पिछले साल इसी समय में यह बजट अनुमान का 39 प्रतिशत था। रिपोर्ट्स की मानें तो इस बढ़ोतरी में मुख्य रूप से खाद्य और यूरिया सब्सिडी का योगदान रहा।
इसके अलावा, अप्रैल-अगस्त के दौरान फ़ूड सब्सिडी पर होने वाला खर्च लगभग 30 फीसदी से बढ़कर 83,510 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह 64,408 करोड़ था। यह पूरे साल के लिए तय 2.28 लाख करोड़ के बजट का 37 था, पिछले साल इसी समय यह बजट अनुमान का 32 प्रतिशत था।
