अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने 23 जुलाई को भारत समेत 60 देशों से होने वाले आयात पर 10% और 12.5% का नया टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद व्यापारिक साझेदारों को मजबूरन मजदूरी यानी Forced Labour से बने सामान के खिलाफ सख्ती बरतने के लिए प्रेरित करना है। बताया जा रहा है कि पहले अमेरिका भारत पर 12.5 टैरिफ लगाने की तैयारी में था लेकिन श्रम मानकों यानी लेबर स्टैंडर्ड को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया।

 

बता दें कि भारत समेत 17 देशों से आने वाले सामान पर 10% नया टैरिफ लगाया है। यह नया टैरिफ 24 जुलाई की सुबह (IST) से प्रभावी हो गया है। ऐसे में आइए जानें अमेरिका की ओर से लगाए गए इस नए टैरिफ का क्या मतलब है, भारत में किन सेक्टर्स पर इसका असर होगा? 

 

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क्यों लगाया गया है टैरिफ? 

अमेरिका का कहना है कि कुछ देशों से ऐसे सामान आ रहे हैं, जिन्हें जबरन या बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से बनाया जाता है। जो देश जबरन श्रम पर कड़े नियम लागू नहीं करते, उन्हें अनुचित व्यापार लाभ मिलता है। ऐसे सामानों पर रोक लगाने और सभी देशों के लिए बराबर व्यापार नियम लागू करने के उद्देश्य से यह नया टैरिफ लगाया गया है।

 

शुरुआत में अमेरिका भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने वाला था। हालांकि, भारत ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव किया, जिसको लेकर अमेरिका के साथ सकारात्मक बातचीत हुई। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित 12.5% शुल्क घटाकर 10% कर दिया। 

किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर और किन्हें मिलेगी छूट?

प्रभावित होने वाले सेक्टर 

अमेरिका के 10% नए टैरिफ का असर भारत के उन उद्योगों पर पड़ सकता है, जो बड़ी मात्रा में अमेरिका को सामान भेजते हैं। इनमें इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल व गारमेंट्स, रसायन (केमिकल), मशीनरी, प्लास्टिक उत्पाद, चमड़े के सामान, हीरे-गहने (जेम्स एंड ज्वेलरी), फर्नीचर और अन्य श्रम-आधारित उद्योग आदि शामिल हैं।   

 

जाहिर तौर पर इसका असर कपड़ा और गारमेंट फैक्ट्री के कर्मचारी, चमड़ा उद्योग के कर्मचारी, जेम्स एंड ज्वेलरी कारीगर, इंजीनियरिंग और मशीनरी फैक्ट्री के कर्मचारी, केमिकल और प्लास्टिक उद्योग के कर्मचारी, फर्नीचर और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगर, पैकिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े कर्मचारी और  MSME उद्योगों के मजदूर और कर्मचारी पर लंबे समय में इसका असर देखने को मिल सकता है।

 

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किन्हें मिलेगी छूट? 

USTR ने स्पष्ट किया है ऐसे उत्पाद जिससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, उनपर टैरिफ नहीं लगेगा। दवाओं (Pharmaceuticals), सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, कुछ कच्चे माल और ऐसे उत्पादों पर नया टैरिफ नहीं लगेगा, जिनसे अमेरिका में जरूरी सामान की कमी हो सकती है।

सेक्शन 232 के उत्पादों पर नहीं है कोई छूट

इसके अलावा स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर यह नया 10% टैरिफ लागू नहीं होगा। इन पर पहले से लागू सेक्शन 232 के तहत ही शुल्क लागू रहेगा।

  • स्टील: 52.5% टैरिफ
  • एल्युमीनियम: 55% टैरिफ
  • ऑटो कंपोनेंट्स: 27.5% टैरिफ

10% टैरिफ वाले देश

भारत उन 17 देशों की लिस्ट में है, जिन पर सीधा 10% टैरिफ लगाया गया है। इसके अलावा, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, एल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) इस लिस्ट में शामिल हैं।  मार्च में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10% कर दिया गया है।