जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस क्राइम ब्रांच के एक जांच अधिकारी को श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में करीब 500 करोड़ रुपये की नकली चांदी चढ़ाए जाने के आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड के साथ खुद पेश होने का निर्देश दिया है। जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट, जिसकी अध्यक्षता मुनीश कुमार मन्हास कर रहे थे, ने जांच अधिकारी को खुद मौजूद रहने और सुनवाई की अगली तारीख 29 जुलाई 2026 को तय की है। इसी दिन अधिकारी को जरूरी रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
दरअसल, इस शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के चांदी के चढ़ावे में हेराफेरी और मिलावट का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता वकील ने लगाया आरोप
इस मामले में शिकायतकर्ता वकील दीपक शर्मा ने क्राइम ब्रांच की कार्रवाई रिपोर्ट को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि पुलिस की इस रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि मामले में FIR दर्ज की गई या नहीं, और न ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करीब 20 टन चांदी के संबंध में लगे आरोपों की कोई सार्थक या विस्तृत जांच की गई।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर की पहली CEO बन सकती है महिला? 18 जुलाई तक आवेदन, 30 दिन में फैसला
दीपक शर्मा का कहना है, 'हाल ही में यह दावा किया गया था कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में लगभग 550 करोड़ रुपये मूल्य की चांदी प्राप्त हुई थी, जिसमें से केवल 20 से 30 करोड़ रुपये मूल्य की चांदी ही असली थी, जबकि शेष चांदी नकली या मिलावटी थी। किसी भी आम व्यक्ति के लिए इस बात पर विश्वास करना बेहद कठिन है।'
नकली चांदी में 'कैडमियम' मिले होने की बात
उन्होंने कहा, 'देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर में चांदी चढ़ाते हैं। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि अलग-अलग जगहों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का चढ़ावा नकली था?' वकील शर्मा ने कहा कि यह आरोप इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इस नकली चांदी में 'कैडमियम' मिले होने की बात सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैडमियम एक अत्यंत विषैली धातु है और इसके व्यापार तथा इस्तेमाल पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है।
यह भी पढ़ें: भोजशाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी, पढ़ें क्या कहा?
...तो पूरे देश में नकली चांदी बिक रही है?
दीपक शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर हमसे यह उम्मीद की जाती है कि हम यह मान लें कि लाखों श्रद्धालुओं ने कैडमियम युक्त नकली चांदी खरीदी थी, तो इसका सीधा मतलब यह भी होगा कि देश भर के अनगिनत दुकानदारों ने इस जहरीली धातु से बनी चांदी खरीदी और उसे बेचा। यह अपने आप में बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।' शर्मा ने बताया कि इन्हीं चिंताओं की वजह से उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग को लेकर नौ मई को पुलिस की क्राइम ब्रांच से संपर्क किया था।
कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा?
हालांकि, दीपक शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और न ही उन्हें जांच की प्रगति के बारे में सूचित किया गया। शर्मा ने कहा कि इस वजह से उनके पास कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा और उन्होंने जून के पहले सप्ताह में कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में, क्राइम ब्रांच ने एक वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल की। इसमें कहा गया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद उसे मंजूरी के लिए पुलिस महानिरीक्षक, अपराध शाखा को भेजा गया था, और उसके बाद इसे किसी अन्य पुलिस प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दिया गया।
हालांकि, याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने इस प्रक्रिया को कानून के खिलाफ बताया है। उनका तर्क है कि गृह विभाग की एक अधिसूचना के तहत क्राइम ब्रांच खुद एक अधिसूचित पुलिस थाना है और इसके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) थाना प्रभारी (एसएचओ) के रूप में कार्य करते हैं। शर्मा ने कहा, 'क्राइम ब्रांच खुद एक पुलिस थाने के रूप में काम करती है। इसलिए, जिम्मेदारी को किसी दूसरी एजेंसी पर टालने के बजाय FIR दर्ज करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी थी।'
