नीट-यूजी री एग्जामिनेशन 2026 के रिजल्ट NTA ने 16 जुलाई को घोषित कर दिए। यह रिजल्ट फाइनल आंसर-की के साथ जारी किया गया था। इस बार ही परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे। इसमें से 11 लाख 21 हजार छात्र पास हुए हैं। इसमें पंजाब के आर्यन गुप्ता ने देशभर में पहली रैंक हासिल की है। जबकि हरियाणा के पंशुल बंसल ने दूसरी और राजस्थान के उपलक्ष्य गोयल ने तीसरी रैंक हासिल की।
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों में से कुछ ऐसे भी छात्र हैं, जिन्होंने अभावों में तैयारी और कड़ी मेहनत करके नीट की कठिन परीक्षा पास की। वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले 13 छात्रों ने भी नीट-यूजी परीक्षा में सफलता हासिल की है।
जींद जिले की छात्र आरजू हुई सफल
ऐसी एक हरियाणा के जींद जिले की छात्र आरजू हैं। आरजू नीट-यूजी परीक्षा में 6,227 रैंक हासिल करके डॉक्टर बनने के सपने की पहली सीढ़ी पार कर ली है। आरजू के माता-पिता सब्जियां बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली आरजू ने अच्छी रैंक से नीट परीक्षा पास करके अपने माता-पिता और जिले का नाम रौशन किया है।
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छात्रा आरजू ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि वह लगातार मॉक टेस्ट देती रहीं, जिससे उनकी तैयारी बेहतर होती गई। उन्होंने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
कठुआ के शान मोहम्मद
इसी तरह से जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के रहने वाले शान मोहम्मद ने कठिन परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई की और नीट-यूजी परीक्षा पास करके एमबीबीएस में एडमिशन लेने जा रहे हैं। शान मोहम्मद कठुआ के गुज्जर समुदाय से आते हैं। शान अपने समुदाय के पहले छात्र हैं, जिसने नीट-यूजी की परीक्षा पास की और आगे चलकर डॉक्टर बनेंगे।
आर्थिक रूप से कमजोर शान ने घर पर रहकर ही खुद से मेडिकल की पढ़ाई की क्योंकि उनका घर पहाड़ी क्षेत्र में है, जहां संसाधन बहुत सीमित हैं। उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने माता-पिता को दिया।
असम के जुड़ा भाईयों ने पास की नीट परीक्षा
असम के धुबरी जिले के रहने वाले दो जुड़वा भाईयों ने एक साथ नीट-यूजी की परीक्षा पास की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले हामिद इस्लाम और हबीब इस्लाम ने एमबीबीएस में अपनी सीट पक्की कर ली है। हामिद के 720 में से 542 और हबीब के 720 में से 535 नंबर आए हैं। दोनों भाई एक साथ मेडिकल की पढ़ाई करते थे। पढ़ाई के दौरान कोई परेशानी होने पर दोनों एक दूसरे की मदद करते थे।
हामिद और हबीब ने अपनी सफलता का राज एक साथ मिलकर और लगातार पढ़ाई को दिया।
असम के तंजीमुल हक
तंजीमुल हक असम के गोलाघाट जिले के डेरगांव के रहने वाले हैं। कमजोर तबके से आने वाले इस छात्र ने भी अभाव में रहकर पढ़ाई की और अपना और अपने परिवार के डॉक्टर बनने के सपने को साकार कर रहा है। तंजीमुल हक ने 720 में से 525 नंबर पाकर ऑल इंडिया रैंक 60,076 हासिल की है।
उन्होंने फिजिक्स वाला एकेडमी के जरिए ऑनलाइन कोचिंग की और साथ ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन रिसोर्स का अच्छे से इस्तेमाल करना और लगातार मॉक पेपर देना उनकी सफलता की चाबी बना।
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असम की महिमा परवीन
महिमा परवीन असम के उदलगुड़ी जिले के खैराबारी, बारपेटा रोड की रहने वाली हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से तंग है। महिमा के पिता 2023 में गुजर चुके हैं। पिता की गैरमौजूदगी में उनकी मां ने किराने की छोटी दुकान चलाकर महिमा और उनके भाई को पाला-पोसा और पढ़ाया है।
पैसे की तंगी और मुश्किल पारिवारिक हालात के बावजूद महिला में अपनी पढ़ाई जारी रखी और 720 में से 516 नंबर पाकर नीट-यूजी की परीक्षा पास की। अब उन्हें आसानी से सरकारी मेडिकल कॉलेड में एडमिशन मिल जाएगा।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों ने पाई सफलता
- उत्तराखंड के चमोली जिले के रहने वाले अनुराग पुरोहित ने 720 में से 655 नंबर हासिल किए हैं। उनकी मां सब्जी बेचती हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई की।
- झारखंड की रहने वाली अंजली महतो ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली कोचिंग 'अकांक्षा कोचिंग कार्यक्रम' से पढ़ाई करके नीट-यूजी की परीक्षा पास की है। उनकी स्कूलिंग भी सरकारी स्कूल से हुई है। अंजली के पिता एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं।
- झारखंड के ही धनबाद की रहने वाली पूनम कुमारी ने 99.13 परसेंटाइल हासिल करके नीट-यूजी की परीक्षा पास कर ली है। एमबीबीएस में एडमिशन लेकर वह आगे चलकर डॉक्टर बनेंगी। पूनम के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। झारखंड के सरकारी स्कूलिंग करने वाली पूनम ने भी सरकारी कोचिंग लेकर सफलता पाई है।
- यूपी की राजधानी लखनऊ की रहने वाली नीलू ने कठिन परिस्थितियों में रहकर नीट की परीक्षा पास की है। नीलू के पिता नहीं है, ऐसे में उनकी मां बहुत ही सीमित पैसों से उन्हें पढ़ा रही हैं।
- राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले दानिश खान ने 720 में से 565 नंबर हासिल करके नीट परीक्षा में सफलता पाई है। उनके पिता सब्जी विक्रेता हैं।
- राजस्थान के ही सीकर जिले के सुनील लोहार ने ओबीसी वर्ग में 5,680 रैंक हासिल की है। सुनील को अब देश के अच्छे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलेगा। उनके पिता भगवान सहाय लोहार का काम करके परिवार का कालन-पोषण करते हैं।
- राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले पोला राम ने ऑल इंडिया 1,041 रैंक हासिल की है और ओबीसी वर्ग में 321 रैंक। छात्र पोला राम का परिवार मनरेगा में मजदूरी करता है। उनकी मां की 2021 में ही मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से ही उनके पिता भी बीमार हैं। पोला राम ने बहुत ही कठिन परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई की है।
- उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले साजिद अंसारी ने ऑल इंडिया 2,118 रैंक हासिल की है। उन्होंने डेल्टा क्लासेस में अला हजरत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी द्वारा चलाया गया फ्री नीट कोचिंग प्रोग्राम से पढ़ाई की। इस पहल ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लगभग 200 मेधावी छात्रों की मदद की है। यह कोचिंग संस्था छात्रों को फ्री कोचिंग, टेस्ट सीरीज, व्यक्तिगत काउंसलिंग और सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स से गाइड करती है।
