चंद दिनों पहले तक गिनती हो रही थी कि केंद्र की मौजूद सरकार दो तिहाई बहुमत जुटा लेगी। आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), शिवसेना (UBT) में हुई टूट के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार जैसे-तैसे करके बहुमत जुटा ही लेगी। अब पिछले कुछ दिनों में तस्वीर बदलती दिख रही है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक के जेल जाने के बाद उन्हें पद से हटाने वाला बिल भी पास कराया जा सकता है लेकिन अब वह भी टल गया है। चर्चा तो यह भी है कि अब केंद्र सरकार का संभावित कैबिनेट विस्तार भी टल सकता है।
सोमवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद यह माना जा रहा है कि विपक्षी दलों के जो सांसद सत्ता पक्ष से करीबी बना रहे थे, वे भी अब दोबारा विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को लेकर जारी चर्चाएं थम सकती हैं। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि सरकार दो तिहाई बहुमत के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही इस बिल को लाना चाहती है। यही वजह है कि सत्र शुरू होने से पहले सरकार की ओर से जिन 7 बिलों का जिक्र किया गया उनमें परिसीमन बिल का जिक्र ही नहीं था।
बैकफुट पर सरकार
सोमवार से पहले तक सरकार पूरे आत्मविश्वास में थी। सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद सरकार को उम्मीद थी कि अब यह प्रदर्शन खत्म हो जाएगा। हालांकि, यहीं सरकार से चूक हो गई। सोनम वांगचुक को उठाए जाने के अगले 24 घंटे में जंतर-मंतर पर भीड़ कई गुना बढ़ गई। पुलिस के तमाम इंतजाम फेल होते दिखे और युवाओं की भीड़ ने सरकार को बातचीत का रास्ता खोलने पर मजबूर कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ताओं ने बताया कि सरकार की ओर से सोमवार की सुबह ही उनसे संपर्क किया गया।
यह भी पढ़ें: 'मोदी, शाह, भी इस्तीफा दें', CJP आंदोलन में पुलिस ऐक्शन पर भड़के राहुल गांधी
लगभग महीने भर से ज्यादा समय से जारी इस प्रदर्शन में जुटे लोगों से पहली बार सरकार की ओर से संपर्क किया गया। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के आवास पर CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका पहुंचे। इन दोनों ने बताया कि दो बार उनकी मुलाकात जे पी नड्डा से हुई, उन्होंने ज्ञापन ले लिया और बात ऊपर तक पहुंचाने की बात कही। हालांकि, बाद में CJP प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बातचीत सिर्फ समय की बर्बादी साबित हुई और उनकी मांगों पर कुछ भी नहीं हुआ।
दरअसल, इन प्रवक्ताओं ने जे पी नड्डा के सामने 3 मांगें रखीं। पहली कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो। दूसरी- सोनम वांगचुक को अस्पताल से डिस्चार्ज किया और तीसरी कि जिन छात्रों ने आत्महत्या की उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये दिए जाएं। हालांकि, सरकार ने इन पर कोई आश्वासन नहीं दिया।
यह भी पढ़ें: 'मैं BJP या कांग्रेस समर्थक नहीं लेकिन...', वायरल हो गया एल्विश यादव का पोस्ट
अब मंगलवार को यह कहा जा रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पेपर लीक मामले में सख्त सजा दी जानी चाहिए। अब ऐसा है कि जे पी नड्डा खुद अस्पताल गए हैं और प्रदर्शन में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। इतना ही नहीं, हाई कोर्ट में सरकार ने यह भी कह दिया है कि सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किए जाने से उसे कोई समस्या नहीं है।
परिसीमन पर पीछे हट जाएगी सरकार?
परिसीमन बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही दो तिहाई बहुमत चाहिए। समस्या यह है कि वह दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है। पिछली कोशिश में यही हुआ था और यह बिल गिर गया था। यही वजह है कि सरकार दो तिहाई बहुमत जुटाने के लिए लगातार कोशिश भले कर रही है लेकिन उसने खुलकर यह नहीं कहा है कि वह यह बिल दोबारा ला रही है। चर्चा है कि सरकार की ओर से विपक्षी दलों जैसे कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) से भी संपर्क किया जा रहा है ताकि जैसे-तैसे करके इसे पास कराया जा सके। इसके बावजूद सरकार खुलकर कहीं इसके बारे में चर्चा नहीं कर रही है।
संसद सत्र शुरू होने तक सरकार दो तिहाई बहुमत तक नहीं पहुंच पाई। अगर DMK खुलकर साथ आ भी जाए तब भी कम से कम 8 से 10 वोट लोकसभा में चाहिए। हालांकि, अब यह संभव है कि DMK जैसे दल अपने पैर खींच लें क्योंकि अचानक से नैरेटिव बदल गया है और अब हवा सरकार के खिलाफ है। ऐसे में DMK इस गुस्से को अपने खिलाफ नहीं लाना चाहती है। दरअसल, पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देश के युवा और उनके परिवार के लोग सरकार से नाराज हैं। ऐसे में जो भी सरकार के पक्ष में खड़ा दिखेगा उसे इस मामले में भी सरकार का समर्थक माना जा सकता है।
यह भी पढ़ें: 'जहां पेपर लीक हो, सख्ती दिखाओ...', PM मोदी ने पेपर लीक पर क्या कहा?
यही वजह है कि DMK जैसे दल अब अपने पैर खींच सकते हैं। इसके अलावा, एक चर्चा यह भी थी कि सरकार को जो अतिरिक्त 8-10 वोट चाहिए उसके लिए वह अलग-अलग छोटी पार्टियों या फिर कुछ सांसदों से व्यक्तिगत तौर पर संपर्क कर सकती है। कई सांसद तैयार भी बताए जा रहे थे लेकिन अब वे भी पीछे हट सकते हैं। ऐसे में सरकार बिना रिस्क लिए कम से कम कुछ दिनों या फिर इस पूरे सत्र के लिए इस बिल को रोक सकती है और आने वाले शीतकालीन सत्र में इसे लाने की कोशिश फिर से की जा सकती है।
कौन से बिल लाने वाली है सरकार?
वैसे तो सरकार कम समय की सूचना में भी नए बिल ला सकती है। इसके बावजूद सरकार ने सत्र की शुरुआत से पहले कुल 7 बिलों का जिक्र किया था। इनमें परिसीमन बिल का नाम नहीं है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उसी की है।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन बिल
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025
- विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
इसके अलावा, चर्चा थी कि परिसीमन बिल के अलावा, बहुचर्चित पीएम-सीएम बिल भी लाया जा सकता है। हालांकि, अब पीएम-सीएम बिल को जेपीसी को भेज दिया गया है।
अगर CJP का यह नैरेटिव सरकार को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब होता है और परिसीमन बिल रुक जाता है तो यह विपक्ष के लिए भी एक संजीवनी साबित हो सकता है। दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद विपक्षी खेमे में भगदड़ सी मच गई है। नरेंद्र मोदी और बीजेपी की धुर विरोधी ममता बनर्जी की आंखों के सामने उनकी पार्टी बिखर गई, उद्धव ठाकरे के सांसदों ने पाला बदल लिया और शरद पवार की पार्टी में भी टूट की आशंका जताई जाने लगी। इस सबके बावजूद अगर सरकार पीछे हटती है तो विपक्ष इसे अपनी नैतिक जीत मान सकता है।
