उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा में हुए बहुचर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। पहले दोषी करार दिए गए सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया गया था और वह 10 महीने पहले जेल से बाहर आ गया था। इस केस में मुख्य आरोपी रहे मनिंदर सिंह पंढेर को भी रिहा किया जा चुका है और वह भी जेल से बाहर है। रोचक बात है कि इसी केस में पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों को दोषी पाया था लेकिन हाई कोर्ट का फैसला पलट जाने के चलते दोनों आरोपी बरी हो गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरी होने के बाद जब सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आया तब उसने हरिद्वार में चाय की दुकान खोल ली थी। कहा जा रहा है कि उसकी लाश इसी चाय की दुकान में लटकती मिली है। हरिद्वार पुलिस ने बताया है कि सुरेंद्र कोली की लाश भूपतवाला इलाके में पाई गई है।
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कब और कैसे मिली रिहाई?
सुरेंद्र कोली नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक के बाद एक करके सारे मामलों में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। बता दें कि इसी घटना से जुड़े मामलों में निचली अदालत सुरेंद्र कोली को फांसी और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था।
56 साल का सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के ही अल्मोड़ा का रहने वाला था। वह नोएडा सेक्टर 31 में मनिंदर सिंह पंढेर के यहां कुक का काम करता था। आरोप थे कि साल 2006 में पंढेर और सुरेंद्र कोली ने मिलकर ही मासूम बच्चों का यौन उत्पीड़न किया, उनकी हत्या की और उनकी लाश के टुकड़े करके लाश को नाले में फेंक दिया।
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साल 2006 में पंढेर के घर के पीछे बहने वाले नाले से 8 बच्चों के कंकाल मिले थे। गिरफ्तारी के बाद सुरेंद्र कोली ने स्वीकार भी किया था कि वह और पंढेर इसमें शामिल थे। हालांकि, धीरे-धीरे पंढेर और कोली दोनों ही इस केस में बरी हो गए और जेल से बाहर आ गए।
