प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। भारत मंडपम में यह बैठक हुई। दोनों देशों ने सीमा गतिरोध समेत तमाम मुद्दों पर बातचीत की। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया दिया कि यह समय द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का है। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को समर्थन और सहयोग देने पर चीन का आभार जताया और शी जिनपिंग का नई दिल्ली में स्वागत किया।
पीएम मोदी ने कहा, 'आपका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक बातों के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। एक बार फिर भारत में आपका स्वागत है।'
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मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने फिर से इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि दोनों पक्षों को तीन आपसी बातों- 'आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित' का पालन करना चाहिए।
विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक जरूरी आधार बनी है। उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करने की दोनों पक्षों की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक नजरिए और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
लोगों के बीच संबंध बढ़ाने पर फोकस
विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों में हुई प्रगति पर ध्यान दिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को और बढ़ाने की जरूरत पर फोकस किया। आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर एक-दूसरे की चिंताओं, जिसमें संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दे शामिल हैं, को दूर करने और सार्थक व अनुमानित बाजार पहुंच को आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
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चीन के योगदान की सराहना
दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर और चुनौतियों से निपटने में आपसी सहमति के क्षेत्रों का विस्तार जारी रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।
