लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार शाम को देहरादून के रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल मैदान में 'छात्रों की गूंज' संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। हजारों छात्रों की मौजूदगी में मंच से उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है बल्कि यह युवाओं, उनके भविष्य, संघर्षों और मुश्किलों के बारे में बात करने के लिए कार्यक्रम है।

 

उन्होंने कहा, 'मैं आप सभी का यहां मुझसे मिलने आने के लिए शुक्रिया अदा करता हूं। मैं आपसे जिस मुद्दे पर बात करना चाहता हूं, वह अभी भारत का मुख्य मुद्दा है। यह हमारे बच्चों के भविष्य, हमारे युवाओं के भविष्य के बारे में है। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था के बारे में है। यह कोई राजनीतिक मीटिंग नहीं है।' मंच संभालते ही राहुल गांधी ने सबसे पहले पेपर की तैयारियों के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों को भी याद किया। 

 

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99 प्रतिशत ईमानदार-गरीब लोगों को नुकसान

 

छात्रों की रैली में राहुल गांधी पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था का फायदा उठाने वाला एक प्रतिशत वर्ग प्रश्नपत्र लीक जैसे रास्ते अपनाता है और इससे 99 प्रतिशत ईमानदार और गरीब लोगों को नुकसान होता है।

 

 

 

 

धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना

 

उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि कई बार प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद, एक भी व्यक्ति को सजा नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के लिए हाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर आपके पास करोड़ों रुपये हैं तो आप पेपर लीक के ‘मेन्यू कार्ड’ से अपनी पसंद का पेपर चुन सकते हैं।

 

 

 

 

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था का हाल ऐसा है कि पेपर लीक होना आम बात हो गई है। प्रश्न पत्र लीक होने से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, 152 मामले सामने आए लेकिन कोई दोषसिद्धि नहीं हुई। 

 

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छात्रों और युवाओं के सामने दो रास्ते

 

छात्रों और युवाओं के सामने दो रास्ते हैं। एक रास्ता है ईमानदारी और कड़ी मेहनत का, जहां आपको पैसे का नुकसान और परिवार का दबाव सहना पड़ेगा। दूसरा रास्ता है, अगर आपके पास पैसा है, अगर आप भ्रष्ट या बेईमान हैं और अगर आप चोरी या धोखाधड़ी करके पास होना चाहते हैं तो एक छिपा हुआ विकल्प है 'पेपर लीक' का रास्ता। उन्होंने कहा कि हमारे 99.9 फीसदी छात्र ईमानदार हैं। वे चोरी के रास्ते पर नहीं चलते। हालांकि, 1 फीसदी लोग इस रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए सिस्टम का फायदा उठाते हैं और बाकी सभी युवाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।