दिल्ली के जंतर-मंतर पर जातिगत आरक्षण के खिलाफ शुक्रवार 21 अगस्त को बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरह ही 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' का आह्वान इंस्टाग्राम पेज से किया गया। इंस्टाग्राम पर रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA) के नाम से बने इस पेज पर करीब 56 लाख फॉलोअर्स हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि आरक्षण देते वक्त जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर देखा जाए।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरक्षण के अंदर भी कोटा बंटे ताकि सबसे जरूरतमंद तक फायदा पहुंचे, EWS वर्ग यानी गरीब सामान्य वर्ग को और सुविधाएं मिलें, बड़े कॉलेजों में दाखिले के लिए कम से कम मार्क्स तय हों, और सरकार बताए कि इतने सालों में आरक्षण से असल में कितना फायदा हुआ।
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क्या है पूरा विवाद?
इस आंदोलन के पीछे की मुख्य वजह है जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग। यह भारत की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकारी शिक्षा और नौकरी में कोटा सामाजिक और आर्थिक वर्गों की बजाय सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर तय होनी चाहिए। इसके अलावा, उनकी मांग है कि एक परिवार, 'एक आरक्षण' जैसी मांगें भी उठाईं और सरकार से UGC के 2026 के जाति-समानता नियमों को वापस लेने को कहा।
जंतर मंतर पर यह पर यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपनी बात दोहराई कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे वर्गों के लिए आरक्षण कोई गरीबी दूर करने की योजना नहीं है, बल्कि यह उन पिछड़े समुदायों को हक दिलाने की योजना है जो पीढ़ियों से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक तौर पर पीछे रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह 2026 के UGC समानता नियमों पर फिर से सोच रही है, जिनकी वजह से इस साल जनवरी में भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की बड़ी मांगें?
1- आर्थिक आधार: आरक्षण जाति नहीं, आर्थिक स्थिति देखकर मिले, ताकि गरीब को जाति देखे बिना पढ़ाई-कोचिंग में मदद मिले।
2- कोटे में कोटा - आरक्षित वर्गों के अंदर भी बंटवारा हो, ताकि फायदा सबसे पिछड़ों तक पहुंचे।
3- श्वेत पत्र - सरकार बताए कि 80 साल में आरक्षण से कितना फायदा हुआ। इसके लिए बिहार के मुसहर समुदाय का उदाहरण दिया गया है।
4- न्यूनतम अंक - IIT-IIM जैसे संस्थानों में दाखिले के लिए कम से कम अंक जरूरी हों, ताकि मेरिट बनी रहे।
5- EWS को ज्यादा सुविधाएं - EWS वर्ग को SC जैसी सुविधाएं (फीस माफी वगैरह) मिलें।
- इसके अलावा SC/ST एक्ट और यूजीसी नीतियों पर भी चिंता जताई गई।
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' में कौन-कौन हैं शामिल?
इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब एक छात्र, हर्ष दुबे ने RHA इंस्टाग्राम पेज शुरू किया। दुबे ने कहा कि उन्होंने पेज की कमान आरक्षण-विरोधी और सामान्य वर्ग के अनुभवी कार्यकर्ताओं अनुराधा तिवारी, अजीत भारती और नेहा दास को सौंप दी है। बाद में इस आंदोलन को करणी सेना, रणबीर सेना (बिहार के आलोक प्रताप सिंह इससे जुड़े हैं, जिन्होंने प्रदर्शन में अपनी बात रखी) और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का समर्थन मिला।
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कब, क्या हुआ?
- 22 जुलाई 2026: छात्र हर्ष दुबे ने रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA) नाम से इंस्टाग्राम पेज शुरू किया। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन चल रहा था।
- 25 जुलाई 2026: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP का आंदोलन खत्म हो गया, जिसके बाद RHA पेज तेजी से आगे बढ़ने लगा।
- जुलाई 2026: इस बीच हर्ष दुबे ने पेज चलाने की जिम्मेदारी अनुभवी कार्यकर्ताओं, अनुराधा तिवारी, अजीत भारती और नेहा दास को सौंप दी, और पेज से लोगों को 21 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई।
- 20 अगस्त 2026: दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं दी गई है, सोशल मीडिया पर चल रहे अनुमति मिलने के दावों को फर्जी बताया। इसी दिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह UGC के 2026 वाले समानता नियमों पर फिर से विचार कर रही है।
- 21 अगस्त 2026: सुबह करणी सेना, रणबीर सेना और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े लोग जंतर-मंतर पहुंचे। पहले मना करने के बाद पुलिस ने रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक और अधिकतम 500 लोगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की एनओसी जारी की, लेकिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही डटे रहे।
- 21 अगस्त 2026: देर रात पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया और कई लोगों को हिरासत में लिया, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें हनुमान चालीसा पढ़ते हुए हटाया गया।
- 21 अगस्त की रात पुलिस-RAF कार्रवाई के बाद हर्ष दुबे की अपील पर कई प्रदर्शनकारी पैदल राजघाट की ओर रवाना हो गए थे।
- 22 अगस्त 2026: हर्ष दुबे ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हम कमजोर नहीं पड़े... मांगें पूरी होने के बाद ही वापस जाएंगे।' दिल्ली पुलिस ने इस दिन भी किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, और जंतर-मंतर पर एथेनॉल के विरोध में होने वाला एक अन्य प्रदर्शन भी रद्द कर दिया।
अब आगे क्या?
अगर तुलना करें तो CJP का आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही खत्म हो गया था, जिसे प्रदर्शनकारियों की जीत माना गया। इस दिशा में 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' अभी उस मुकाम से दूर है, न सरकार ने अभी तक इसपर कोई भरोसा दिया है। हालांकि, हर्ष दुबे और उनके साथी डटे हुए हैं और मोदी को ज्ञापन सौंपे बिना पीछे हटने को तैयार नहीं। ऐसे में अब यह देखना होगा कि आंदोलन CJP जैसी जल्दी जीत हासिल करता है या लंबा खिंचता है।
