दिल्ली के जंतर मंतर पर शुक्रवार को 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' की अपील पर जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ हजारों लोग पहुंचे। सोशल मीडिया पर चल रहे इस आंदोलन के समर्थन में लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति जंतर मंतर पर नहीं बल्कि रामलीला मैदान पर दी थी।

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर और उसके आसपास किसी भी तरह के प्रदर्शन, जुलूस या सभा की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद लोग वहां जमा हो गए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई वीडियो और तस्वीरें आईं, जिनमें पुलिस कर्मी प्रदर्शनकारियों को ले जाते दिख रहे थे। 

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क्या चाह रहे हैं प्रदर्शनकारी?

लोग बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर आए थे और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस प्रदर्शन की शुरुआत इंस्टाग्राम से हुई। 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' नाम के इंस्टाग्राम पेज ने लोगों से 21 अगस्त को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अपील की थी। इस पेज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं। 

 

 

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकारी सहायता और आरक्षण में जाति की जगह आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी जाए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि गरीब व्यक्ति चाहे किसी भी जाति का हो, उसे शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए मदद मिलनी चाहिए।

रामलीला मैदान पर थी प्रदर्शन की इजाजत

जंतर मंतर इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए थे। लोगों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई थी। दिल्ली पुलिस ने कहा कि रामलीला मैदान पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के बैनर तले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया गया था। 

 

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जंतर मंतर पर उमड़े हजारों लोग

वहां अधिकतम 500 लोग शाम 4 बजे तक इकट्ठा हो सकते थे। पुलिस ने कानून-व्यवस्था के नजरिए से रामलीला मैदान पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। रामलीला मैदान की जगह हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर उमड़ पड़े। 

 

क्या है प्रदर्शनकारियों की 3 बड़ी मांगें?

इन्फ्लुएंसर अजीत भारती भी आरक्षण हटाओ आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी मांग है कि सरकार एक श्वेत पत्र लाए जिसमें यह बताया जाए कि जो आरक्षण आपने लोगों को 80 साल से दिया है। मैं बिहार से आता हूं। रिसर्च करके देखिए कि मुसहर समुदाय की हालत कितनी खराब है। उनके बच्चों को आरक्षण नहीं मिल रहा है। क्यों? क्योंकि उन जाति समूहों के पास नेता ही नहीं हैं।'

अजीत भारती ने कहा, 'दूसरी मांग 'कोटे के अंदर कोटा' की है, जिस पर सरकार ने यह भी कहा है कि हम इसमें 'क्रीमी लेयर' लागू नहीं करेंगे। आप इसे लागू क्यों नहीं करेंगे? यह बहुत अजीब बात है कि सरकार उन कुछ दलित नेताओं के आगे झुक रही है जो सिर्फ़ अपनी जाति समूह की बात करते हैं।'

 

 



अजीत भारती ने कहा, 'तीसरी मांग न्यूनतम अंकों की है। आप मेरिट से समझौता करके विकसित भारत का सपना नहीं बेच सकते। अगर 50 प्रतिशत  योग्य युवा या पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को IIT, IIM या उच्च शिक्षा में दाखिला नहीं मिलेगा, तो आपकी कार्यक्षमता वहीं 50 फीसदी कम हो जाएगी फिर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को अनुसूचित जातियों (SC) का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जिस वर्ग की परिभाषा ही 'आर्थिक रूप से कमजोर' है, उन्हें न तो आप फॉर्म खरीदने में कोई सुविधा दे रहे हैं, न ही उनकी हॉस्टल फीस माफ कर रहे हैं, और न ही उनकी कोर्स फीस माफ हो रही है। सिर्फ उन्हें मान्यता देने से आपको क्या हासिल होगा? कम से कम यह तो बताएं कि हम इस बारे में बैठकर बातचीत करने वाले हैं।'