उत्तराखंड में भूकंप आने का खतरा मंडरा रहा है। यह आशंका आईआईटी बॉम्बे की स्टडी रिपोर्ट में जताई गई है। इसमें बताया गया है कि उत्तराखंड की जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकरा रही हैं, जिससे भूकंप आने का खतरा बढ़ता है। स्टडी में आशंका जताई गई है कि 8.1 मैग्नीट्यूड का तेज भूकंप आ सकता है। भूकंप आने की वजह से राज्य में भारी नुकसान हो सकता है। इतनी तीव्रता का भूकंप इससे पहले 1950 में असम में आया था, जिसमें लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था।

 

भारत में अब तक सबसे तेज मैग्नीट्यूड का भूकंप असम में आया था। यह भूकंप 1950 में आया था। तब भारत को आजादी मिले कुछ ही समय हुआ था। इसी दौरान लोगों ने 8.7 मैग्नीट्यूड का तेज भूकंप झेला था। इस दौरान हजारों लोगों की जान गई थी।

 

यह भी पढ़ें: जामिया की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ के नारे, मचा बवाल

स्टडी में क्या बताया गया?

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मैक्सिको और IIT बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक रिसर्च की है। रिसर्च रिपोर्ट ऑनलाइन पेश की गई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड की जमीन के नीचे दो प्लेटें अब करीब आ चुकी हैं, जिस कारण दोनों प्लेटों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। ऐसी परिस्थिति होने की वजह से उत्तराखंड में भूकंप आने का खतरा बढ़ गया है। रिसर्च रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि 8.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप आ सकता है।

 

शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भूकंप की वजह से सिर्फ पहाड़ी इलाके प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि कुछ मैदानी इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। मैदानी क्षेत्रों में दिल्ली, कानपुर, पटना और लखनऊ जैसे शहर हैं, जिन्हें भूकंप का सामना करना पड़ सकता है। उत्तराखंड में पहले भी भूकंप आ चुके हैं, लेकिन 8.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप उत्तराखंड में पहले कभी नहीं आया है।

 

यह भी पढ़ें: 'वादे से मुकर रही सरकार, लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाए', भड़क गए सोनम वांगचुक

उत्तराखंड में पहले कब आया भूकंप?

1803 में उत्तराखंड के गढ़वाल में भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 7.8 मैग्नीट्यूड थी। इसके बाद 1991 में उत्तरकाशी में 6.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था। फिर 1999 में उत्तराखंड के चमोली में 6.4 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था। इन आंकड़ों से साफ होता है कि उत्तराखंड में 1999 के बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है।

1950 में आया था सबसे तेज भूकंप

15 अगस्त 1950 को पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था। तभी शाम के लगभग 7 बजकर 30 मिनट पर 8.6 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था। इस भूकंप की वजह से 480 लोगों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही हजारों लोगों के घर और खेत नष्ट हो गए थे। असम में रहने वाले किसानों के 50,000 से लेकर 1,00,000 तक जानवर मारे गए थे। इसी तबाही के मंजर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भूकंप कितना खतरनाक हो सकता है।