लद्दाख के सोनम वांगचुक और केंद्र सरकार के बीच राज्य के दर्जे को लेकर बैठक होने वाली थी। 22 अक्टूबर को होने वाली यह बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद सोनम वांगचुक ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मई 2026 में लद्दाख के समूहों के साथ किए गए वादों से पीछे हट रही है। सोनम के मुताबिक, मई में सरकार ने वादा किया था कि लद्दाख को विधायिका वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। हालांकि, अब सरकार इस वादे से मुकर रही है। इसके बाद सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की है।
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि 22 अक्टूबर को केंद्र सरकार के साथ उनकी बैठक होने वाली थी, जो रद्द हो गई। इससे पहले 15 अक्टूबर को लेह में हुई बातचीत भी पूरी तरह असफल रही क्योंकि उसका कोई नतीजा नहीं निकला। इसी सिलसिले में सोनम वांगचुक ने कहा कि मोदी सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है।
यह भी पढ़ें: 98 साल के BJP नेता लालकृष्ण को हुआ चेस्ट इन्फेक्शन, दिल्ली के अस्पताल में भर्ती
सोनम वांगचुक ने लगाया आरोप
सोनम वांगचुक ने कहा, 'सरकार ने कहा था कि लद्दाख के पास पूर्ण राज्य का दर्जा पाने के लिए जरूरी संसाधन नहीं हैं। हमने अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों और विधायिका वाले एक केंद्र शासित प्रदेश की मांग की थी। 22 मई की बैठक में सरकार इस पर सहमत हो गई थी, हालांकि अब केंद्र सरकार कह रही है कि न तो पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा और न ही कोई विधायिका होगी। इसके बजाय, वे एक छोटी-सी परिषद (काउंसिल) बनाने की बात कर रहे हैं, जो लद्दाख के लिए शर्मनाक और अपमानजनक है।'
इसके बाद सोनम वांगचुक ने अपनी मांग का दायरा बढ़ाते हुए कहा, 'अब हमारी मांग है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।' उन्होंने कहा कि इससे चीन और बाकी दुनिया को एक संदेश जाएगा।
यह भी पढ़ें: 5 दिन की कस्टडी में भेजे गए CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका
चीन की तरफ से मिल रहा दबाव
सोनम वांगचुक ने वीडियो में कहा, 'हमें चीन की तरफ से दबाव मिलता है। चीन कहता है कि वह लद्दाख को मान्यता नहीं देता और लद्दाख चीन का हिस्सा है। मगर भारत, जिसके साथ हमारा प्यार-मोहब्बत का रिश्ता है, वह भी अपने हर वादे से मुकर रहा है। लद्दाख के लोगों को बाकी देश के लोगों के बराबर दर्जा भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में हम लोकतंत्र से भी वंचित हैं।'
सोनम वांगचुक के मुताबिक, लेह में 15 अक्टूबर को एक बैठक हुई थी। इसके बाद लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के प्रतिनिधि 22 अक्टूबर को होने वाली बातचीत के लिए तैयार थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस बैठक में केंद्र शासित प्रदेश (UT) स्तर की संस्था और जिला परिषदों की शक्तियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। हालांकि, ऐसा नहीं हो पाया।
