सुप्रीम कोर्ट के जज ने दुष्कर्म के दोषी की उम्रकैद की सजा घटा दी है। इस दोषी को 2016 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसकी 10 साल की सजा पूरी हो चुकी है। जब दोषी की तरफ से याचिका दाखिल की गई, तो जज ने दोषी के सुधरने की गुंजाइश को देखते हुए सजा घटा दी। यह फैसला सुनाते वक्त जज ने बताया कि पिछले 10 सालों से जेल में दोषी का व्यवहार अच्छा रहा है। साथ ही उसने कम उम्र में अपराध किया था, इसलिए उसकी उम्रकैद की सजा घटाई जा रही है।
यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनाया। यह फैसला सोमवार यानी 20 जुलाई को सुनाया गया। जहां जज ने बताया कि दोषी ने अपराध 25 साल की उम्र में किया था। साथ ही इससे पहले उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इस वजह से दोषी को सजा में रियायत दी जा रही है। जानकारी के मुताबिक, वह 2016 में बलात्कार के आरोप में दोषी पाया गया था, जिस वजह से उसे उम्रकैद की सजा मिली थी।
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दोषी को लेकर जज ने क्या कहा?
दोषी को लेकर न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, 'दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके साथ राज्य सरकार ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि दोषी अब सुधर नहीं सकता। दोषी ने जेल में पिछले 10 साल से अच्छा व्यवहार किया है।' इन्हीं बातों को मद्देनजर रखते हुए यह फैसला लिया गया।
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दोषी पर लगा गंभीर आरोप
दिल्ली की एक पीड़िता ने 27 सितंबर 2016 को पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि वह देर रात दिल्ली स्टेशन से घर जा रही थी। घर जाने के लिए उसने रिक्शा लिया था। तभी रिक्शा चालक महिला को एक जगह ले गया, जहां एक शख्स पहले से मौजूद था। दोनों आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। इन्हीं आरोपों के आधार पर निचली अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 25000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
