कांग्रेस नेताओं ने यूपीआई टैक्स के समर्थन करने से जुड़ी रिपोर्ट का खंडन किया। वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने कहा कि समिति के सदस्य होने के नाते यूपीआई पर टैक्स का समर्थन नहीं किया। आरोप लगाया कि सरकार संसदीय स्थायी समिति की कार्यवाही का इस्तेमाल यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के अपने फैसले के बचाव में कर रही है।
गौरव गोगोई ने कहा कि समिति ने यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं की। उनके बयान का कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर से यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया। जयराम रमेश ने कहा कि यूपीआई टैक्स के फैसले के बाद पैदा हुए बड़े जनाक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार बेहद घटिया कोशिश कर रही है।
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गौरव गोगोई ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'मैं इस बात को दोहराता हूं कि हाल की यूपीआई कर नीतियां छोटे भारतीय व्यापारियों, विक्रेताओं और उद्यमियों को नुकसान व बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं। यूपीआई टैक्स वापस लें। प्रधानमंत्री मोदी आत्मसमर्पण करना बंद करें।'
समर्थन से जुड़े दावे पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'दुर्भाग्य से संसद की स्थायी समितियों की कार्यवाही, जिन्हें विशेषाधिकार प्राप्त माना जाता है, अब सरकार द्वारा राजनीतिक फायदा हासिल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।'
उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे सहयोगी गौरव गोगोई की बात सही है कि 15 अक्टूबर 2026 से यूपीआई लेनदेन पर लगाए जाने वाले एमडीआर के संबंध में कोई विशिष्ट प्रस्ताव वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष कभी नहीं लाया गया था। यह दावा करना कि समिति के 'कुछ सदस्यों' ने किसी खास उपाय का समर्थन किया था, संसद की समिति की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक चित्रण है।'
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उन्होंने कहा, 'जैसा कि मेरे सहयोगी गौरव गोगोई ने बताया है, एमडीआर के सिद्धांत या वैचारिक आधार पर भी समिति की विभिन्न बैठकों के दौरान सदस्यों ने इसकी जरूरत, प्रभावकारिता आदि के संबंध में चिंताएं व्यक्त की गई थीं।'
क्या है पूरे विवाद की जड़?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर टैक्स लगाने का विरोध किया था। इसके बाद सरकार ने दावा किया कि संसद की स्थायी समिति में कांग्रेस नेताओं ने भी इसका समर्थन किया गया। बीजेपी ने दावा किया कि 12 अगस्त को रिपोर्ट को स्वीकार करते वक्त समिति में शामिल कांग्रेस सांसदों पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल शर्मा और के. गोपीनाथ मौजूद थे। लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया।
यूपीआई में सरकार ने क्या बदलाव किया?
मोदी सरकार ने हाल ही में यूपीआई के मर्चेंट भुगतान पर 0.4 फीसद एमडीआर लगाया है। यह टैक्स 2000 रुपये अधिक मर्चेंट भुगतान पर लागू होगा। वहीं 2000 से कम किसी भी भुगतान पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह नया नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि पर्सन टू पर्सन भुगतान पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। a
