त्रिपुरा और मिजोरम के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों ने अगरतला में पहले दौर की बातचीत की। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि त्रिपुरा और मिजोरम लगभग 109 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित पहाड़ियों में बसा दूर-दराज का गांव फुलदुंगसेई उनके बीच विवाद की वजह बना हुआ है। 

 

त्रिपुरा और मिजोरम, दोनों ही फुलदुंगसेई को अपना हिस्सा बताते हैं। सीएम साहा ने कहा, 'त्रिपुरा और मिजोरम के मुख्य सचिवों के बीच पहले दौर की बैठक गुरुवार को अगरतला में सरकारी गेस्ट हाउस में हुई।' उन्होंने उम्मीद जताई कि लंबे समय से जारी सीमा विवाद का बातचीत के जरिये सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा।

 

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माणिक साहा ने दी जानकारी

माणिक साहा ने कहा, 'हाल में संपन्न एक बैठक में मैंने मिजोरम के अपने समकक्ष लालदुहोमा के सामने सीमा विवाद का मुद्दा उठाया और वह इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए तुरंत सहमत हो गए। कल की बैठक इसी समस्या को हल करने की दिशा में एक अगला कदम थी।'

क्या है मामला?

उन्होंने आगे कहा कि मिजोरम के मुख्यमंत्री इस पर सहमत हो गए और बातचीत के लिए राजधानी आने की इच्छा जताई। बाद में, दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच शुरुआती बातचीत करने का फैसला किया गया। त्रिपुरा सरकार ने 2020 में एक बॉर्डर गांव के 130 लोगों के नाम मिजोरम की वोटर लिस्ट में शामिल होने के बाद जांच का आदेश दिया था। त्रिपुरा के उत्तरी जिले के कंचनपुर सब-डिवीजन में मौजूद फूलडुंगसेई गांव को त्रिपुरा का हिस्सा मान लिया गया है, हालांकि इसका पूर्वी हिस्सा मिजोरम में आता है।

 

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टीटीएएडीसी चुनाव में सीट बंटावरा

त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) की ग्राम समितियों के चुनाव के बारे में पूछे जाने पर माणिक साहा ने कहा कि एनडीए भारी अंतर से चुनाव जीतेगा। उन्होंने कहा, 'टीटीएएडीसी चुनाव के लिए अप्रैल में टिपरा मोथा पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन पाई थी, लेकिन इस बार तीनों पार्टियां-बीजेपी, टीपरा मोथा और आईपीएफटी-एकजुट होकर एनडीए के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए सहमत हैं। हमें पूरा भरोसा है कि हम ग्राम समितियों के चुनाव में बड़ी जीत हासिल करेंगे।'