केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने राजस्थान में अपने खीरे के फार्म के लिए अपनी ही मंत्रालय की योजना से करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी ली है। राजस्थान के दीदवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में चौधरी का फार्म है। यहां पॉलीहाउस, तालाब और बाड़ लगे बड़े बगीचे में खीरा की खेती हो रही है। 

फार्म पर लगा साइनबोर्ड साफ बताता है कि इस प्रोजेक्ट को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की मदद मिली है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बोर्ड सब्सिडी के रूप में कुल लागत का 50 फीसदी,करीब 99.60 लाख रुपये दे रहा है।

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मंत्री बोर्ड के उपाध्यक्ष, फिर भी मिली सब्सिडी

भगीरथ चौधरी नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के एक्स-ऑफिशियो उपाध्यक्ष हैं। बोर्ड का अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होता है। यह बोर्ड ही मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत व्यावसायिक हॉर्टिकल्चर, बड़े पैमाने पर मुनाफे वाली खेती को बढ़ावा देने वाली योजना चलाता है।

योजना क्यों खास है?

 इस योजना के तहत खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और कुछ फूलों की खेती पर 50 फीसदी तक ठूट देती है। इसकी राशि, अधिकतम 1 करोड़ रुपये प्रति परिवार हो सकीत है। साल 2025-26 में इस योजना के तहत पूरे देश में सिर्फ 467 प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे। भगीरथ चौधरी का प्रोजेक्ट भी इन्हीं में शामिल है।

कैसे मिली सब्सिडी?  

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 में भगीरथ चौधरी ने ऑनलाइन आवेदन किया। 14 दिन में इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल गई।  मार्च 2026 में अंतिम मंजूरी हुई। 30 मार्च 2026 को HDFC बैंक के लोन अकाउंट में 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी ट्रांसफर कर दी गई। प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें से 1.49 करोड़ रुपये का लोन HDFC बैंक से लिया गया और बाकी पैसा मंत्री का अपना निवेश है।

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क्यों सवाल उठ रहे हैं?

वैसे तो आधिकारिक रूप से बोर्ड के उपाध्यक्ष को प्रोजेक्ट मंजूर करने की सीधी भूमिका नहीं है, लेकिन मंत्री का अपना प्रोजेक्ट अपनी ही मंत्रालय की योजना से पास होना हितों के टकराव का सवाल खड़ा करता है। भगीरथ  चौधरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को मार्च 2025 में दी गई संपत्ति की घोषणा में इस प्रोजेक्ट का जिक्र नहीं किया था। बाद में उनके सहायक ने कहा कि विवरण सरकार को दिया जाएगा।इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट बताती है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। साल 2018 में भी भगीरथ चौधरी और उनके बेटे ने इसी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब दोनों आवेदन खारिज हो गए थे।

योजना का मकसद क्या है?

यह योजना किसानों को बड़ी पैमाने पर व्यावसायिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करती है। न्यूनतम 4000 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए और बैंक से लोन लेना जरूरी है। सब्सिडी लोन अकाउंट में ही जमा होती है। भगीरथ चौधरी अजमेर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं।