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'पार्टी विरोधियों को भी मिले पद', अपनी ही पार्टी से क्यों खफा हैं प्रतिभा सिंह?

हिमाचल कांग्रेस में सरकार और संगठन के बीच बढ़ती दरार सामने आने लगी है। पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने नियुक्तियों में पर्याप्त सलाह-मशविरा न होने पर असंतोष जताया है।

Pratibha Singh upset Himachal Congress over Government Appointments

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य की पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, Photo Credit: PTI

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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर एक बार फिर सवाल उठते नजर आ रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार में हुई नियुक्तियों को लेकर नाराजगी की बात कही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से नाराज नहीं हैं लेकिन सरकार और संगठन से जुड़े फैसलों में पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं होने पर उन्होंने असंतोष जरूर जताया। प्रतिभा सिंह का यह बयान उस वक्त आया है जब मुख्यमंत्री सुक्खू सहित स्वयं प्रतिभा भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के लिए दिल्ली में हैं। 

 

प्रतिभा सिंह ने कहा कि हम नाराज नहीं हैं। वह हमारी सरकार के मुखिया हैं और हमने उन्हें मुख्यमंत्री चुना है। इसलिए नाराज होने की कोई बात नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब परिवार बैठता है तो सभी से चर्चा की जाती है और फिर राय बनाई जाती है। उनका संकेत साफ था कि सरकार और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में सभी वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा होना चाहिए।

 

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प्रतिभा सिंह ने जाहिर की नाराजगी

वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री प्रतिभा सिंह ने कहा कि पार्टी के भीतर कई बार यह महसूस होता है कि फैसले लेने से पहले पर्याप्त परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उन्हें दुखी करती है और जब ऐसा लगता है तो पार्टी नेतृत्व के सामने समय रहते अपनी बात रखी जाती है।

 

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हिमाचल कांग्रेस में सरकार के भीतर राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज है। लिहाजा प्रतिभा सिंह की टिप्पणी को केवल व्यक्तिगत असहमति के बजाय सरकार और संगठन के बीच संवाद एवं भागीदारी के सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

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प्रतिभा सिंह ने उठाए सवाल

प्रतिभा सिंह ने राजनीतिक नियुक्तियों पर अपनी असली आपत्ति भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार बनाने के लिए मेहनत की और पार्टी को सत्ता में वापस लाने में भूमिका निभाई लेकिन नियुक्तियों में ऐसे लोगों को भी पद दिए गए जिन्होंने पार्टी के लिए कोई योगदान नहीं किया। उन्होंने यहां तक कहा कि कुछ ऐसे लोगों को भी पद दिए गए जिन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया था। प्रतिभा सिंह के मुताबिक यही वह मुद्दा है जिससे वह और पार्टी के कई लोग असंतुष्ट हैं।

 

उनका कहना है कि, 'हमारी नाराजगी केवल इस बात को लेकर है कि ऐसे कई लोगों को नियुक्तियां दी गई हैं जिन्होंने पार्टी के लिए कोई योगदान नहीं दिया। इनमें से कई ने पार्टी के खिलाफ भी काम किया है, फिर भी उन्हें पद दिए गए। लोग भी इससे नाराज हैं।'

 

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बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं?

प्रतिभा सिंह का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह केवल वरिष्ठ कांग्रेस नेता ही नहीं बल्कि संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। ऐसे में सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर उनकी सार्वजनिक टिप्पणी कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करती है।

 

एक तरफ मुख्यमंत्री सुक्खू सरकार में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नियुक्तियों के जरिए संगठन के अलग-अलग धड़ों को साधने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिभा सिंह का यह कहना कि पार्टी के लिए जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। कांग्रेस के भीतर कौन कितना योगदान दे रहा है और किसे उसका राजनीतिक इनाम मिल रहा है की बहस को सामने लाता है।

 

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अब निगाहें सुक्खू सरकार के अगले कदम पर

प्रतिभा सिंह के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और संगठन के बीच राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर संवाद बढ़ेगा? क्या आने वाली नियुक्तियों में पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी? या फिर यह विवाद कांग्रेस के भीतर गुटीय राजनीति को और हवा देगा?

 

फिलहाल प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सीधे सवाल नहीं उठाया है लेकिन नियुक्तियों, सलाह-मशविरे और पार्टी के लिए योगदान देने वालों की अनदेखी को लेकर उनकी टिप्पणी ने हिमाचल कांग्रेस के भीतर की राजनीति को जरूर गरमा दिया है।


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