जेल से बाहर आने के कुछ ही महीनों बाद संत रामपाल एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है वृंदावन के चर्चित संत प्रेमानंद महाराज पर उनकी विवादित टिप्पणी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में रामपाल ने प्रेमानंद महाराज की साधना पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ राधा-राधा का जाप करने से मोक्ष नहीं मिल सकता। उन्होंने गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 का हवाला देते हुए दावा किया कि शास्त्रों में बताए गए तरीके से ही साधना की जानी चाहिए। 

 

रामपाल का कहना है कि आध्यात्मिक साधना के लिए सही नाम और शास्त्रसम्मत विधि जरूरी है। उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए मेडिकल साइंस का उदाहरण भी दिया और कहा कि जिस तरह किसी बीमारी के लिए सही दवा जरूरी होती है, उसी तरह मोक्ष के लिए भी सही साधना जरूरी है। इसी बयान के बाद सोशल मीडिया पर दोनों संतों की विचारधाराओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।

 

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पहले भी कर चुके हैं टिप्पणी

यह पहली बार नहीं है जब रामपाल ने दूसरे धार्मिक गुरुओं या हिंदू धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठाए हों। इससे पहले वह अयोध्या के राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर मूर्ति में वास्तव में भगवान की मौजूदगी है, तो मंदिर में चोरी जैसी घटना कैसे हो सकती है। लेकिन रामपाल की पहचान सिर्फ विवादित बयानों से नहीं बनी। इसके पीछे करीब तीन दशक लंबी एक ऐसी यात्रा है, जिसमें एक जूनियर इंजीनियर धार्मिक गुरु बना, हजारों-लाखों अनुयायियों का नेटवर्क खड़ा हुआ, कई आश्रम बने और फिर वही शख्स देश के सबसे चर्चित धार्मिक विवादों में शामिल हो गया।

कौन हैं रामपाल?

रामपाल का जन्म 1951 में हरियाणा के सोनीपत के धनाना गांव में हुआ था। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी की। इसके बाद धार्मिक झुकाव बढ़ा और उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी। 1990 के दशक के मध्य से उन्होंने सत्संग शुरू किया और कबीर पंथ की शिक्षाओं को अपने तरीके से प्रचारित करना शुरू किया।

 

1999 में रोहतक के करौंथा गांव में पहला सतलोक आश्रम स्थापित किया गया। धीरे-धीरे उनके सत्संगों में भीड़ बढ़ने लगी और उनका धार्मिक नेटवर्क हरियाणा से बाहर भी फैलने लगा। उनके संगठन के मुताबिक, कुछ ही वर्षों में उनके अनुयायियों की संख्या लाखों तक पहुंच गई थी। 

विवादों ने बढ़ाई पहचान

रामपाल का सबसे बड़ा विवाद 2006 के करौंथा आश्रम कांड से जुड़ा है। आर्य समाज के अनुयायियों और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव में एक व्यक्ति की मौत हुई। इस घटना के बाद रामपाल और आर्य समाज के बीच विवाद लंबे समय तक चलता रहा। इसके बाद 2014 का बरवाला सतलोक आश्रम कांड उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बना। 

 

पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आश्रम पहुंची थी। पुलिस और उनके समर्थकों के बीच टकराव हुआ और आश्रम परिसर में पांच महिलाओं तथा एक बच्चे की मौत हुई। बाद में हत्या के दो मामलों में रामपाल को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। रामपाल करीब 11 साल 4 महीने 24 दिन जेल में रहे। अप्रैल 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए। कोर्ट ने उनकी उम्र, लंबे समय से हिरासत और मामले की धीमी सुनवाई जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राहत दी थी।

 

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जेल के बाद भी रुतबा बरकरार?

रामपाल की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ आश्रम नहीं, बल्कि उनका संगठित अनुयायी नेटवर्क और डिजिटल पहुंच है। जेल में रहते हुए भी उनके नाम से सत्संग और धार्मिक कंटेट ऑनलाइन चलता रहा। उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल के करीब 12 लाख सब्सक्राइबर और 11.5 करोड़ से ज्यादा व्यूज दर्ज हैं।

 

अप्रैल 2026 में जेल से बाहर आने के बाद उनके समर्थकों ने बड़े स्तर पर उनका स्वागत किया और अगले ही दिन उन्होंने सत्संग भी किया। अब उनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इतने विवादों में रहने के बावजूद पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों के बड़े और प्रभावशाली लोग उनसे मिलने आते हैं। उनके आश्रम में विधायकों सांसदों और मंत्रियों का आना-जाना लगा रहता है।