इलाहाबाद हाई कोर्ट में बुधवार को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों का प्रदर्शन हंगामे में बदल गया। प्रदर्शन के दौरान अदालत में फर्नीचर फेंका गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक दिन पहले जस्टिस अजय भनोट की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। एसोसिएशन का आरोप है कि जज ने एक वकील के साथ दुर्व्यवहार किया।

हाई कोर्ट से सामने आए वीडियो में कई वकील जस्टिस भनोट की अदालत के बाहर नारेबाजी करते दिख रहे हैं। उस समय जस्टिस भनोट जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत के साथ बैठे थे। वकीलों ने नारेबाजी की और आरोप है कि उन्होंने अदालत में फर्नीचर और दूसरी चीजें फेंकीं। 

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बुधवार को इस हंगामे को अदालत की अवमानना वाला बताया। उन्होंने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को सीसीटीवी फुटेज हासिल करने और शामिल लोगों की पहचान करने का निर्देश दिया है। अब अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सके।

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बार एसोसिएशन जस्टिस भनोट पर भड़का क्यों?

बार एसोसिएशन ने 27 अक्टूबर को रजिस्ट्रार जनरल के जरिए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। पत्र के मुताबिक विवाद की शुरुआत तब हुई, जब एक वकील ने पुलिस अधीक्षक (SP) के उस पंक्ति में बैठने पर आपत्ति की, जो आमतौर पर वकीलों के लिए रखी जाती है। 

 

एसोसिएशन का कहना है कि जस्टिस भनोट की अदालत में पुलिस अधिकारियों और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग कुर्सी लगाई जा रही थी। वकील ने SP से पीछे बैठने को कहा था। इसके बाद विवाद हुआ।

जज ने उंगली दिखाई, वकील से मंगवाई माफी, अब हंगामा 

पत्र में आरोप है कि एक सरकारी वकील ने इस वकील को टोका और जज से शिकायत की। इसके बाद जज ने उंगली दिखाते हुए वकील को जेल भेजने का आदेश दिया। पत्र के मुताबिक जब वकील ने माफी मांगी तो जज ने उसे पुलिस अधिकारी से माफी मांगने पर मजबूर किया। 

 

एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि जज ने वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव का मजाक उड़ाया। एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से मामले का संज्ञान लेने की मांग की थी। उसने कार्रवाई न होने पर जस्टिस भनोट की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।

 

 

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क्या कह रहे हैं इलाहाबाद के वकील?

इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील संदीप श्रीवास्तव ने बताया ने खबरगांव के साथ बातचीत में कहा, 'जो जगह पुलिस अधिकारी के लिए है नहीं, वहां बैठा क्यों। यह अनुरोध होता तो वकील नहीं नाराज होते। जज के पास भी यह अधिकार नहीं है कि वह वकीलों के साथ अभद्रता करें, उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करें। विधि सम्मत व्यवहार नहीं है। यह मामला बातचीत से सुलझाया जा सकता था।' 

 

एडवोकेट संदीप ने अदालत के भीतर कुर्सियां फेंकने की निंदा की। उन्होंने कहा कि बार को सामंजस्या बिठाकर इस विवाद को खत्म करना चाहिए। उन्होंने कहा बार और बेंच को सहयोगी की तरह काम करना चाहिए। दोनों में किसी का भी गलत होना, न्याय व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। अदालत में ऐसे हंगामे ठीक नहीं हैं।