दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 20 अगस्त तक शहर में कुल 1,777 पुष्ट मामले दर्ज हो चुके हैं। पिछले 2 हफ्तों में कई अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टर बता रहे हैं कि हर उम्र के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। अधिकतर मरीज इलाज से ठीक हो रहे हैं। कुछ मरीजों में निमोनिया और गंभीर मामलों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (RDS) जैसी जटिलताएं भी देखी गई हैं। 

ज्यादातर मामलों में लोगों को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। फिलिक्स हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर रश्मि गुप्ता ने बताया कि मानसून सीजन में दिल्ली में तेजी से H1N1 वायरस के मामले बढ़े हैं। उन्होंने कहा है कि जिन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। 

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किन्हें ज्यादा खतरा है?

जो लोग ज्यादा जोखिम में हैं, उनमें डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं। बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों में निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं लेकिन बहुत कम लोगों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है। 

दिल्ली के मरीजों में क्या लक्षण दिख रहे हैं?

फेलिक्स हॉस्पिटल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. रश्मि कुप्तार ने कहा, 'H1N1 के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, थकान और कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।'

उन्होंने बताया, 'बुखार लगातार बना रहे, लक्षण बिगड़ने लगें या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर डायग्नोसिस और इलाज से H1N1 से पूरी रिकवरी संभव है।'

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क्या बचाव कर सकते हैं?

  • हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से धोएं
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करें
  • खांसते या छींकते समय मुंह को टिश्यू या कोहनी से ढकें
  • लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और एहतियात बरतें

कैसे पहचानें H1N1 वायरस संक्रमण?

आयशा हेल्थ केयर के चीफ डॉ. जावेद अख्तर ने बताया, 'जांच के लिए नाक या गले का स्वैब लेकर RT-PCR टेस्ट किया जाता है। यह सबसे सटीक तरीका माना जाता है। जल्दी नतीजे के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट भी इस्तेमाल होता है। इलाज में मुख्य रूप से ओसेल्टामिविर नामक एंटीवायरल दवा दी जाती है, जो बीमारी शुरू होने के शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा असरदार होती है।

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क्या सावधान बरतनी चाहिए?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि साल में एक बार सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवाएं। यह वैक्सीन खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और लंबे समय से बीमार लोगों के लिए जरूरी है। वैक्सीन लगाने के दो-तीन हफ्ते बाद इम्यूनिटी बनती है। एंटीबायोटिक न लें। लक्षण दिखते ही पहले 48 घंटों में एंटीवायरल शुरू करें, पैरासिटामोल लें और जल्द डॉक्टर से मिलें। 

डॉ. जावेद अख्तर ने बताया, 'स्वाइन फ्लू एच1एन1 वायरस से होता है। यह नाक, गले और फेफड़ों का संक्रमण है। इसके आम लक्षणों में बुखार, खांसी, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान, पसीना और ठंड लगना शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरल संक्रमण का मौसम है, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है।'