पिछले कुछ महीनों से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन चर्चा में है। इसकी शुरुआत NEET पेपर लीक और छात्रों-युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी। देखते ही देखते यह आंदोलन सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया। आंदोलन ने तब और जोर पकड़ा, जब सोनम वांगचुक भी इसके समर्थन में सामने आए। वांगचुक 20 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे, बाद में पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया।
आखिर जंतर मंतर पर यह आंदोलन क्यों चल रहा है? इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसकी प्रमुख मांगें क्या हैं और महज दो महीने में यह आंदोलन संसद तक कैसे पहुंच गया? आइए आसान भाषा में इसकी पूरी कहानी समझते हैं।
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कब और क्यों शुरू हुआ विवाद?
लोगों के बीच आक्रोश तब पैदा हुआ, जब पेपर लीक के चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया था। बता दें कि NTA का काम देश भर में उच्च शिक्षा और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए बड़ी प्रवेश परीक्षाएं कराना है। वहीं NEET UG एक टेस्ट है, जिसे पास करने पर बच्चों को MBBS, BDS, AYUSH जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है।
देशभर में लाखों छात्रों ने NEET-UG परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने या दोबारा होने के तनाव और डर की वजह से कई बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली। माता -पिता में आक्रोश पैदा हुआ, यहीं से छात्रों का गुस्सा बढ़ना शुरू हुआ। छात्र सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाने लगे।
कैसे बनी CJP, कौन हैं अभिजीत दीपके ?
इसी बीच सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर 16 मई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम से एक पार्टी बनाई। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने युवाओं को कॉकरोच कहा। यहीं से इस पार्टी का नाम सामने आया। अभिजीत दीपके ने सीजेपी के जरिए NEET पेपर लीक का मुद्दा उठाया।
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कब-कब, क्या-क्या हुआ?
अभिजीत दीपके परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों को न्याय दिलाने का मुद्दा लेकर वह चल रहे थे। उन्होंने बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे भी उठाने शुरू कर दिए। कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर लाखों युवा CJP से जुड़ गए। इसके बाद पार्टी ने परीक्षा पेपर लीक व बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर समर्थन जुटाना शुरू कर दिया।
- 1 जून 2026: सीजेपी ने अपने पहले बड़े सड़क प्रदर्शन का ऐलान किया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई।
- 6 जून 2026: दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP का पहला बड़ा धरना और प्रदर्शन हुआ। अभिजीत दीपके पहली बार समर्थकों के साथ सड़क पर उतरे और प्रदर्शन किया।
- 20-21 जून 2026: CJP ने जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उन्होंने कहा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी दिन-रात वहीं डटे रहे।
- 28 जून 2026: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन से जुड़े और जंतर मंतर पर उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी। इसके बाद इस आंदोलन की चर्चा पूरे देश में होने लगी। सेलिब्रिटी और नेताओं ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया।
सोनम वांगचुक के जुड़ने से क्या बदला?
सोनम वांगचुक जंतर मंतर आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने कहा आंदोलन छात्रों को न्याय दिलाने और सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए है। इस आंदोलन को दिल्ली के बाहर भी समर्थन मिलने लगा। सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च का आयोजन किया।
जंतर-मंतर से संसद तक कैसे पहुंचा आंदोलन?
18 जुलाई 2026 को यानी भूख हड़ताल के 21वें दिन सुबह दिल्ली पुलिस जंतर मंतर पहुंची और सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने का हवाला देते हुए जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई। तब दीपके भूख हड़ताल पर बैठे। अस्पताल से ही सोनम वांगचुक ने संदेश दिया कि अगर वह खुद शामिल नहीं हो पाए, तब भी 20 जुलाई का 'संसद चलो' मार्च जारी रहना चाहिए। आज संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP और सोनम वांगचुक के आह्वान पर 'संसद चलो' मार्च निकाला गया। लेकिन, पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी।
सरकार से क्या मांगें हैं?
इस बीच सरकार की ओर से CJP प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल भी हुई। CJP के प्रवक्ता सौरव जोशी और अशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की है, यह मुलाकात करीब 2 घंटे की थी। पार्टी ने अपनी मांगें लिखित तौर पर उन्हें सौंप दी हैं। इसमें सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा करने, धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से तत्काल इस्तीफा और NEET की वजह से जान देने वालों बच्चों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी है।
