सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने सोमवार शाम छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का पूर्णकालिक चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश उस समय आई है जब हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप चल रहे हैं। ये आरोप सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने लगाए हैं।
सिफारिश उसी दिन हुई जब जस्टिस शर्मा ने 5 सितंबर तक न्यायिक काम से खुद को अलग कर लिया। जयपुर और जोधपुर के वकील उनके हटाए जाने और नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जस्टिस अग्रवाल को सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज बनाया गया था। कॉलेजियम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ तथा बीवी नागरत्ना शामिल थे।
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जस्टिस एसपी शर्मा पर क्या आरोप हैं?
जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को सीजेआई को पत्र लिखकर दूसरे हाई कोर्ट से नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने और जस्टिस शर्मा को राजस्थान से ट्रांसफर करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा ने रोस्टर के मास्टर के रूप में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया, मामलों को अपने कोर्ट में ट्रांसफर किया और ऐसे आदेश दिए जिनसे निर्णय प्रक्रिया की ईमानदारी पर सवाल उठे।
जस्टिस संदीप मेहता ने क्या सवाल उठाए?
जस्टिस संदीप मेहता ने प्रभावशाली और अमीर पक्षकारों के पक्ष में काम करने और शक्तियों के खुले दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। 10 अगस्त के पत्र में जस्टिस संदीप मेहता ने उदयपुर की जमीनों और एक खनन व्यवसायी से जुड़े दो मामलों का जिक्र किया। उन्होंने भाई-भतीजावाद का आरोप भी लगाया और कहा कि जस्टिस शर्मा ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता की बहू की पदोन्नति का समर्थन किया, अपने करीबी वकीलों का पक्ष लिया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों के साथ बदले की कार्रवाई और जोधपुर मुख्यालय से जुड़े प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल उठाए।
हाई कोर्ट के जज और वकील भी नाराज हैं?
जस्टिस मेहता ने दावा किया कि राजस्थान हाई कोर्ट के जजों ने उनसे जस्टिस शर्मा के व्यवहार पर दुख जाहिर किया। 17 अगस्त के पत्र में उन्होंने जोधपुर जिला अदालत भवन के उद्घाटन में देरी, 31 जुलाई की पूर्ण अदालत बैठक में लगभग 96 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाने के प्रस्ताव और जयपुर में तीन दिवसीय सम्मेलन पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च का जिक्र किया।
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CJI सूर्यकांत ने क्या कहा है?
26 अगस्त को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बयान में कहा गया कि कॉलेजियम ने जस्टिस मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है, लेकिन किसी बैठे जज के खिलाफ आरोपों को स्थापित संस्थागत प्रक्रिया से निपटाया जाना चाहिए। आरोपों को केवल इसलिए सच नहीं माना जा सकता क्योंकि वे लगाए गए हैं। संबंधित जज को जवाब देने का मौका मिलना चाहिए।
कॉलेजियम की पहल क्या है?
कॉलेजियम बाकी हाई कोर्टों में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर काम कर रहा है। इस विवाद के बाद जयपुर और जोधपुर में वकीलों ने विरोध किया। राजस्थान हाई कोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने 6 सितंबर तक पूर्ण हड़ताल की घोषणा की है। वे जस्टिस शर्मा से प्रशासनिक जिम्मेदारी हटाने और नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। एसोसिएशन CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रतिनिधित्व भेजेगी।
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गुस्से में क्यों हैं वकील, क्या है तैयारी?
जयपुर में पुलिस को हाई कोर्ट परिसर में बुलाया गया। जोधपुर में भी वकीलों ने नारे लगाए। जस्टिस शर्मा सोमवार से न्यायिक काम नहीं कर रहे हैं। संशोधित रोस्टर के अनुसार वे 6 सितंबर तक किसी बेंच पर नहीं बैठेंगे। उनके मामले अन्य बेंचों को दिए गए हैं। वह सितंबर 2025 में जस्टिस एस श्रीराम के रिटायर होने के बाद से 10 महीने से अधिक समय से कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में काम कर रहे हैं। जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं।
