उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट का अतिरिक्त प्रिंसिपल जज बनाया गया है। उनके मुजफ्फरनगर और बरेली के कार्यकाल में कुल 36 मौत की सजा दी गईं।

जज रवि कुमार दिवाकर को 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 का प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाया गया था। वे मुजफ्फरनगर और शामली जिलों के आपराधिक मामले सुन रहे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच उन्होंने 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई। 

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6 महीने में सुना दी 23 मौत की सजा 

7 सितंबर को उन्होंने अपनी 23वीं मौत की सजा एक ऐसे व्यक्ति को दी, जिसने अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया था। बरेली में उन्होंने 13 मौत की सजाएं दी थीं। अतिरिक्त सत्र जज शिव कुमारी को अब फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में भेजा गया है। 

अगस्त में उनके कोर्ट से कम से कम 97 लंबित केस फाइलें वापस ले ली गई थीं। इनमें हत्या और अन्य गंभीर अपराध के मामले शामिल थे। ये फाइलें तब के जिला और सत्र जज बिरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर वापस ली गई थीं। वह अब रिटायर हो चुके हैं।

जज रवि कुमार दिवाकर ने एनडीपीएस एक्ट के एक फैसले में इस बात पर सवाल उठाए थे कि प्रशासनिक आधार पर केस कैसे वापस लिए जा सकते हैं और उसके पीछे कोई वजह दर्ज क्यों नहीं की गई। 

 

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कौन से फैसले चर्चा में रहे?

मई 2022 में वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का कोर्ट निगरानी वाला वीडियोग्राफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था। यह आदेश पांच हिंदू महिलाओं के श्रृंगार गौरी स्थल पर पूजा के अधिकार से जुड़े मामले में आया था। 

सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद के वजू खाना में एक ढांचा शिवलिंग है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस मामले को वाराणसी के जिला जज की अदालत में ट्रांसफर कर दिया। 

फैसलों की वजह से मिल चुकी हैं धमकियां

सर्वे आदेश के बाद रवि कुमार दिवाकर को धमकियां मिलीं और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा हुई। 2024 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियों की शिकायत की। मुजफ्फरनगर में भी उन्होंने अपनी सुरक्षा में बदलाव पर सवाल उठाए और यूपी के डीजीपी को लिखा कि उनका गनर हटाए जाने से सुरक्षा कमजोर हो गई है। पुलिस का कहना था कि वैकल्पिक कर्मचारी तैनात किए गए थे।

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कौन हैं रवि कुमार दिवाकर?

रवि कुमार दिवाकर की उम्र 46 साल है। वह साल 2009 में यूपी न्यायिक सेवा में जज के तौर पर जुड़े। वह  बीकॉम, एलएलबी. और एलएलएम हैं। पहले वह आजमगढ़, सुल्तानपुर और बदायूं में रहे। अप्रैल 2021 से जुलाई 2022 तक वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रहे, फिर बरेली गए। अप्रैल से नवंबर 2025 तक चित्रकूट में रहे और उसके बाद मुजफ्फरनगर आए। अब वह मुजफ्फरनगर फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रिंसिपल जज के रूप में काम करेंगे।